तरनतारन.एड्स के शिकार मरीज को सिविल अस्पताल में दाखिल करना तो दूर डाक्टर ने उसका इलाज तक नहीं किया। मजबूरन पिछले चार माह से वह गरीब निजी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए मजबूर है। महंगा इलाज होने के कारण परिवार अब भुखमरी की हालत में है।
पति के निधन के बाद तरनतारन निवासी स्वर्ण कौर का बेटा ही एकमात्र सहारा था। एक वर्ष पूर्व उसे तेज बुखार हुआ। जांच कराने पर पता चला कि बेटे को एड्स हो गया है। स्वर्ण कौर ने आरोप लगाया कि चार माह पहले संदीप को एक गहरा जख्म हो गया। इसके इलाज के लिए वह उसे लेकर तरनतारन के सिविल अस्पताल पहुंची तो डॉ. निर्मल सिंह ने उसे वहां से भगा दिया। इस पर उसका प्राइवेट इलाज करवाना पड़ रहा है। अब कई दिन तो उन्हें भूखे ही सोना पड़ता है। राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारियों से बेटे के इलाज के लिए मदद की गुहार की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
दूसरी ओर बेटे का जख्म अभी तक ठीक नहीं हो पाया है। एड्स ग्रस्त मरीज चार माह पूर्व मेरे पास आया था। उसकी हालत दाखिल करने वाली नहीं थी। इसलिए उसे घर भेज दिया गया। अब वह जो आरोप लगा रहे हैं, बेबुनियाद है।
डा. निर्मल सिंह, मैडिकल डाक्टर सिविल अस्पताल, तरनतारन
मामला मेरे नोटिस में है। मैंने मरीज को उस समय की रिपोर्ट और अन्य कागजात लाने के लिए कहा था। उसने बाद से उन्होंने मुझसे संपर्क नहीं किया। अस्पताल आने पर उसका तुरंत इलाज होगा।
-डा. अमृत कौर, सिविल सर्जन, तरनतारन