नई दिल्ली.मनमोहन सरकार के पांचवें बजट में हर जगह सोनिया गांधी की छाप दिखती है। यदि पहले के चार बजट आर्थिक सुधारक मनमोहन सिंह और राजनीतिज्ञ सोनिया के बीच संतुलन कायम करने की कोशिश थे, तो इस साल के बजट में सभी पैमाने सोनिया के ही पक्ष में हैं।
अगले आम चुनाव के मद्देनजर बजट में साफतौर पर सोनिया की तमाम चिंताओं, प्रिय मुद्दों और सामाजिक कार्यक्रमों का ध्यान रखा गया है। इनमें किसान, महिलाएं, जनजातियां, दलित, समाज के अन्य वंचित वर्ग, सीमांत ग्रामीण वर्ग आदि शामिल हैं।
इस बजट का मुख्य नतीजा निश्चित तौर पर किसानों को मिली व्यापक कर्ज माफी है। इसी का नतीजा है कि दिल्ली के आसपास के इलाकों से किसान 10 जनपथ आकर सोनिया को इस बोनांजा के लिए धन्यवाद दे रहे हैं। बजट में कांग्रेस के परंपरागत चुनाव क्षेत्रों का खास ध्यान रखा गया है। लंबे समय के बाद कांग्रेस ने शहरी, मध्यम वर्ग को लुभाने की कोशिश के तहत विभिन्न करों में कटौतियों और छठे वेतन आयोग के मार्फत सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का वादा किया है।
भाजपा के वोट बैंक पर नजर
आम चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस वोट देने वाले ज्यादा से ज्यादा वर्र्गो को आकर्षित करने की उम्मीद में व्यापक जाल फैलाने में लगी है। इसमें भाजपा के परंपरागत शहरी चुनाव क्षेत्र भी शामिल हैं।