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चिदंबरम के बाउंसर से बैकफुट पर भाजपा

नई दिल्ली वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर भाजपा को सबसे करारा झटका दिया है। मध्यम वर्ग, खासकर वेतनभोगी वर्ग को अपना सबसे बड़ा वोट बैंक मानने वाली भाजपा को मलाल है कि एनडीए ने ही यह कदम उठा लिया होता तो आज विपक्ष में नहीं बैठे होते। पार्टी को डर है कि छठे वेतन आयोग के ऐलान से रही-सही कसर भी पूरी हो जाएगी।

उधर, किसानों के मुद्दे पर संसद से सड़क तक हंगामा बरपाने वाली अकाली दल जैसी सहयोगी पार्टियां भी अभी कुछ कहने में हिचक रही हैं। पार्टी नेता अब सरकार के इस मास्टर स्ट्रोक की काट ढूंढने में लग गए हैं। एनडीए सरकार में अहम भूमिका निभाने वाले एक भाजपा नेता ने खुलासा किया कि पार्टी के दबाव के बावजूद जसवंत सिंह और यशवंत सिन्हा के विरोध के चलते आयकर छूट की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर अमल नहीं हो पाया था।

तत्कालीन वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने भास्कर को बताया कि उन्होंने कई तरह की रियायतें देकर आयकरदाताओं को फायदा पहुंचाया था। 1998 में आयकर छूट की सीमा भी बढ़ाई गई थी जबकि एनडीए का आखिरी बजट पेश करने वाले जसवंत सिंह बातचीत के लिए उपलब्ध नहीं थे। इन मुद्दों के बाद अब भाजपा का हमला कुल मिलाकर सरकार के कथित सांप्रदायिक बजट पर केंद्रित होकर रह गया है।

किसानों के मामले को लेकर अब विपक्ष का प्रमुख हथियार यह होगा कि निजी साहूकारों से लिए गए कर्ज की माफी का कोई प्रावधान क्यों नहीं किया गया। हालांकि पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह ने आक्रामकता बरकरार रखने की कोशिश की है। उनका कहना है कि जब तक निजी साहूकारों से लिए कर्ज माफ नहीं किए जाते, तब तक किसानों की दुर्दशा खत्म नहीं होगी।

सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव का भी कमोबेश यही कहना था। यादव ने दावा किया कि विपक्ष पूरी तैयारी के साथ संसद में बहस के दौरान अपनी बात रखेगा।





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