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Shekhawati Shekhawati सीकर. दांतारामगढ़ में रविवार को होने वाले एक राजनीतिक आयोजन को लेकर प्रदेश तक खासी हलचल है। इस समारोह में कई कांग्रेसी दिग्गज शिरकत करेंगे। हजारों की तादाद में लोगों के शामिल होने के दावे के बीच इसे कांग्रेस के एक खेमे की ताकत दिखाने की कवायद मानी जा रही है। विशेषकर जिले की राजनीति में बड़ा कद समझे जाने वाले सिंह पहले लोकसभा और बाद में विधानसभा चुनावों में करारी मात झेल चुके हैं।
इस सियासी घटना के बाद से ही सिंह का कद कमजोर माना जाने लगा था। ऐसे में राजनीतिक हलकों में इस आयोजन के कई मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके माध्यम से जहां एक तरफ जिले में बिखराव की स्थिति में पहुंची कांग्रेस को एकजुटता देने का प्रयास किया जाएगा, वहीं खुद सिंह भी अपने घटते जनाधार को बढ़ाने की फिराक में हैं।
यह आम चर्चा रही कि गत चुनावों में जहां नारायणसिंह ने 42 हजार वोटों से जीत दर्ज की, वहीं इनके विपक्ष में 82 हजार वोट भी गए। विपक्षी दलों में माकपा, बसपा, भाजपा व अन्य दलों ने जमकर वोटों में सेंध की थी। हाल ही में प्रधान के चुनावों में भी सिंह खेमे को करारी मात मिली थी। इस बार आने वाले चुनावों में यह स्थिति और भी बुरी हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि धोद के आरक्षित होने के बाद अमराराम संभवत: दांतारामगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह नारायणसिंह के लिए मुसीबत का वायस होगा। भले ही माकपा चुनावी वैतरणी दांता से पार न कर सके, लेकिन वह इस स्थिति में कांग्रेस की राह जरूर बाधित कर सकती है। एक तरफ माकपा का खौफ और दूसरी तरफ लोकसभा व विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का अभाव, सिंह के लिए अपना जनाधार मजबूत करना बेहद जरूरी है और कल का आयोजन इस दिशा में सिंह का पहला कदम होगा।