लखनऊ. यूनीसेफ के ललितपुर मॉडल की सफलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अब अपने इलाज की योजना खुद बनायेंगे। विश्व बैंक के सुझाव पर राज्य सरकार फिलहाल पहले चरण में बहराइच, बदायूं, बांदा और मैनपुरी जिलों में ‘विलेज एक्शन प्लान पायलट’ करने जा रही है। दूसरे चरण में यह योजना अन्य अठारह जिलों में लागू की जायेगी।
उत्तर प्रदेश की ‘हेल्थ सिस्टम डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट’ के तत्वावधान में शुरु हो रही इस योजना का लक्ष्य स्वास्थ्य विभाग में नियोजन प्रक्रिया को गांव से लेकर जिला, मंडल और राज्य स्तर तक पहुंचाना है। इसके तहत चार जिलों में प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट का खाका तैयार कर लिया गया है। अब इसे जल्दी ही लागू कर दिया जायेगा। इस कार्यक्रम में ग्राम्य स्वास्थ्य समिति, एएनएम व आशा संस्था भी सहयोग करेगी।
इसमें गांवों की योजना के आधार पर जिला स्तरीय फिर जिले की योजना के आधार पर प्रदेश स्तरीय समग्र योजना तैयार की जायेगी। सरकार योजना के बाबत इस बात पर भी सहमत है कि इसे लागू करने में यदि किसी नीति या प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता होगी तो वह भी किए जायेंगे। इस पायलट प्रोजेक्ट की अवधि दो साल निर्धारित की गयी है।
योजना के वरिष्ठ अधिकारी अजय प्रताप ने बताया इस योजना के समानान्तर ‘बिहेवियर चेंज कम्यूनिकेशन’ योजना भी प्रारम्भ की जायेगी। इसके तहत ग्रामीणों का व्यवहार बदलकर बीमारियों व उनसे होने वाली मौंतो पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जायेगा।