गुड़गांव.कृषि योग्य जमीन बेचने के बाद गुड़गांव के किसानों के सामने रोजगार की समस्या पैदा हो गई है। जमीन बेचकर ये लोग करोड़पति बन गए और महंगी गाड़ियां भी ले ली लेकिन आय का कोई स्थाई जरिया नहीं बचा।
ऐसे में वह तमाम तरह के धंधों में किस्मत आजमा रहे हैं। कुछ किसानों को शराब के ठेकेदार बनने की सूझी है। ठेके जारी होने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की सूचना मिलते ही ग्रामीण सीधे आबकारी विभाग के दफ्तर की तरफ दौड़ लगा रहे हैं। ठेका लेने में कितना खर्च होगा, इसकी उन्हें परवाह नहीं, बस लक्की ड्रॉ से ठेका मिल जाना चाहिए। इसके लिए एक-एक आदमी अलग-अलग नामों से पांच से दस फार्म भर रहा है।
टिकली गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि उसने देसी शराब का ठेका लेने के लिए पांच फार्म जमा कराए हैं। इनकी जमानत राशि पांच लाख रुपए थी। अगर ठेका नहीं मिला तो सिर्फ 25 हजार रुपए ही बेकार जाएंगे। बाकी रकम वापस मिल जाएगी। वह चाहता है कि हर कीमत पर उसे ठेका मिल जाए।
डिप्टी एक्साइज एंड टेक्सेशन कमिश्नर अशोक शर्मा भी कहते हैं कि पहली बार देसी शराब ठेकों के लिए ऐसी मारा-मारी देखी जा रही है। इन ठेकों के लिए जहां पिछले साल 957 आवेदन आए थे वहीं इस साल 133 ठेकों के लिए महज चार दिनों में 1250 फार्म बिक चुके हैं। अनुमान है कि दो हजार से अधिक आवेदन आएंगे।
नई आबकारी नीति फायदे का सौदा
हरियाणा की नई आबकारी नीति में राज्य सरकार ने देसी शराब ठेकेदारों को काफी लाभ दे दिया है। शराब की रिटेल प्राइज पांच रुपए बढ़ा दी है। सरकार ने 55 रुपए की बोतल की कीमत 60 रुपए तय की है। डिप्टी एक्साइज एंड टेक्सेशन कमिश्नर अशोक शर्मा के अनुसार इस वृद्धि का सीधा फायदा शराब विक्रेताओं को होगा।