भुवनेश्वर, (उड़ीसा).विजन-2020 के अनुसार उड़ीसा में 6-14 वर्ष आयु वर्ग के 12.74 लाख बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। इनमें 54 प्रतिशत लड़कियां हैं। इन बच्चों में प्राथमिक विद्यालय जाने वाले उम्र के 51.25 प्रतिशत बच्चे हैं। प्राथमिक विद्यालय स्तर पर स्कूल से बाहर बच्चों में लड़कियों की संख्या (60 प्रतिशत) अधिक है। लेकिन मध्य विद्यालय स्तर पर कुछ ही लड़कियां स्कूल से महरूम हैं।
इसके विपरीत नबकृष्ण चौधरी सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज द्वारा तैयार उड़ीसा मानव विकास रिपोर्ट, 2002 के अनुसार 5-14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में बालश्रमिक केवल 15 प्रतिशत हैं। इस प्रकार यह आंकड़ा लगभग दस लाख होता है। इसके साथ-साथ रिपोर्ट यह भी बताती है कि 6-14 वर्ष आयु वर्ग के 37 प्रतिशत बच्चे 2002 तक स्कूल नहीं जाते थे। इसका अर्थ यह हुआ कि वर्ष 2002 तक 20 लाख 55 हजार बच्चे स्कूल से महरूम थे।
यूनिसेफ के राज्य प्रतिनिधि श्रेडैक ओमॉल कहते हैं, ‘‘हजारों बच्चों को सुरक्षा, विकास और जीने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है। यही वह समय है जब हमें इन बच्चों के अंदर छिपी वेदना और अभिलाषा को देखना है।’’
बाल श्रम पर भुवनेश्वर में आयोजित चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ओमॉल ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान बच्चे अपनी समस्याओं, मांगें और मुद्दों पर आपस में बातें करते हैं। इसके अलावा वे समाज से बाल श्रम को मिटाने के लिए रणनीति भी बनाते हैं। उड़ीसा के श्रम और रोजगार मंत्री जय नारायण मिश्रा ने सम्मेलन में लोगों को सूचित किया कि राज्य सरकार बाल श्रम को मिटाने के लिए प्रतिबद्घ है।
मिश्रा ने बताया कि राज्य के 22 जिलों में एनसीएलपी लागू किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि एनसीएलपी द्वारा संचालित स्कूलों में छठी से आठवीं तक की कक्षाएं खोलने के प्रस्ताव पर केंद्र सहमत हो गया है।