इंदौर. वित्तीय वर्ष खत्म होने में एक ही माह बाकी है और महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज का बजट मंजूर किया गया। हालांकि यह औपचारिकता ही है क्योंकि बजट का बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है।
मेडिकल कॉलेज की गतिविधियां संचालित करने के लिए तीन व्यवस्थाएं हैं। पहली अधीक्षक और डीन की, उससे ऊपर कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक्जिक्यूटिव कमेटी और सबसे ऊपर चिकित्सा शिक्षामंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) की अध्यक्षता वाली गवर्निग बॉडी। विभागाध्यक्षों के प्रस्ताव पर अधीक्षक और डीन कॉलेज का बजट प्रस्ताव बनाते हैं। वह एक्जिक्यूटिव कमेटी की स्वीकृति से गवर्निग बॉडी में आता है। वहां पारित होने के बाद खर्च किया जा सकता है।
यह व्यवस्था कॉलेज की वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखने और मनमानी रोकने के लिए है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए गवर्निग बॉडी में अफसरों के साथ जनप्रतिनिधि, अभिभावक व छात्र प्रतिनिधि भी हैं ताकि किसी प्रस्ताव पर आपत्ति हो तो निराकरण किया जा सके लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हो पाया। 12 अगस्त 2006 के बाद गवर्निग बॉडी की बैठक ही नहीं हुई। विभागाध्यक्षों के प्रस्ताव धूल खाते रहे और खाते में 14 करोड़ रुपए से अधिक होने के बाद भी मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पाईं। बैठक शनिवार को हुई जो वित्त वर्ष के अंतिम महीने का पहला दिन था। विभागाध्यक्षों का कहना है अब बजट पारित करने का क्या फायदा।
मुख्यमंत्री के ‘विवेक’ से मंत्री असहमत
जनवरी में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कलेक्टर विवेक अग्रवाल को कॉलेज की एक्जिक्यूटिव कमेटी में एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर बनाने की बात कही थी, लेकिन डॉ. शैजवार ने इससे सहमत नहीं। बैठक में उन्होंने कलेक्टर से कहा आपकी नियुक्ति पर पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री से बात करेंगे। श्री अग्रवाल एजेंडे के प्रस्ताव बताने लगे तो डॉ. शैजवार ने टोंका सारी बात आप ही कहेंगे तो डीन कब सीखेंगे।