इंदौर. ऊंची-ऊंची बिल्डिगों पर लगने वाली फीस व टैक्स की फेहरिस्त में प्रीमियम ऑन एफएआर (पीओएफ) भी जुड़ गया है। इसका प्रावधान मास्टर प्लान-2021 में किया गया है। इसे मिलाकर 18 तरह की फीस व टैक्स नक्सा पास कराने के लिए ही लगने लगे हैं। शुरुआत ही लाखों रुपए से होने के कारण पीओएफ भवन निर्माताओं को भारी पड़ रहा है। यह नए नक्शों के साथ पहले से मंजूर नक्शों के रिविजन में भी मांगा जा रहा है। इसके लिए इंदौर के बिल्डर और प्राधिकरण पदाधिकारी सोमवार को भोपाल जाकर मंत्री और डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से भी मिले लेकिन केवल आश्वासन ही मिला।
पीओएफ के प्रावधान के चलते जिन भवनों के नक्शे 4-5 लाख रुपए में स्वीकृत हुए थे उनमेंछोटे-मोटे हिस्से के रिविजन के लिए 55 लाख का फीस मेमो दे दिया गया। नए नक्शों की स्वीकृति की बात ही अलग है। इसी कारण मास्टर प्लान आने के 60 दिन बाद भी एक भी व्यवसायिक नक्शा स्वीकृत नहीं हुआ। जानकार बताते हैं पुरानी फीस में भी बगैर स्वीकृति के निर्माण की शिकायतें आम थीं। ऐसे में नए प्रावधान से अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इसी आशंका के चलते निगमायुक्त नीरज मंडलोई ने प्रीमियम राशि कम करने के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा है।
अठारह मंजिला शुल्क
1. प्रीमियम ऑन फ्लोर एरिया (पीओएफ)
2. भवन अनुज्ञा (क्षेत्रफल के हिसाब से अलग-अलग दर)
3. पटरी शुल्क (प्लॉट और सड़क की चौड़ाई के आधार पर)
4. नर्मदा केपिटल फंड (10 रुपए प्रति वर्गफीट)
5. वाणिज्यिक शुल्क (2500 वर्गमीटर तक 40 हजार रुपए)
6. पार्किग कमिटमेंट
7. जल संयोजन खुदाई
8. ड्रेनेज संयोजन खुदाई
9. टॉयलेट शुल्क
10. जल पुनर्भरण
11. पौधारोपण
12. संयुक्तिकरण शुल्क (अलग-अलग प्लॉट हों तो)
13. विभाजन शुल्क (एक ही भवन में फ्लैट्स या दुकानें हों तो)
14. लीज अंतरण
15. वार्षिक लीज
16. कर्मकार कल्याण
17. आवाज शुल्क
18. अन्य