नई दिल्ली.अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए भारत ने साफ कर दिया है कि एटमी करार को लेकर वह केवल द्विपक्षीय ‘123 समझौते’ के प्रति प्रतिबद्ध है और विवादास्पद हाइड एक्ट करार का आधार नहीं है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री सहित वहां के विभिन्न आला अधिकारियों ने एटमी सहयोग के लिए हाइड एक्ट के प्रावधानों को अनिवार्य बताया है।
लोकसभा में सोमवार को विदेश नीति पर अपनी ओर से बयान देते हुए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, ‘हाइड एक्ट अमेरिकी सरकार के कार्यकारी व विधायी अंगों के बीच का प्रावधान है। अमेरिका के साथ परमाणु सहयोग पर भारत के अधिकार व दायित्व द्विपक्षीय 123 परमाणु करार से बंधे हैं और इस पर अमेरिका के साथ हमारी सहमति हो चुकी है।’ पिछले माह अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने कहा था कि बुश प्रशासन एनएसजी में ऐसे किसी मामले में भारत का समर्थन नहीं करेगा जो हाइड एक्ट के खिलाफ हो। अमेरिकी कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं करेगी।
सहमति के प्रयास जारी : मुखर्जी
ने कहा, ‘आईएईए से रक्षा उपायों पर बातचीत चल रही है। इस मुद्दे पर देश में राजनीतिक आम सहमति बनाने के प्रयास हम जारी रखेंगे।’
सरकार को आगे नहीं बढ़ना चाहिए
हम सरकार की इस दलील से सहमत नहीं हैं कि हाइड एक्ट के प्रावधान भारत के लिए नहीं हैं। सरकार को आगे नहीं बढ़ना चाहिए। अक्लमंद को इशारा ही काफी है।
- सीताराम येचुरी, माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य
हाइड एक्ट को लेकर दोहरी बातें की जा रही हैं। क्या भारत अमेरिका से कहेगा कि वह हाइड एक्ट के प्रावधानों को लेकर करार में संशोधन करें?
- विजयकुमार मल्होत्रा, प्रवक्ता, भाजपा संसदीय दल