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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur कोरबा. जिले के १८ और बच्चे भी दसवीं की परीक्षा से वंचित हो गए। उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कोई और नहीं, उनके ही स्कूल के प्राचार्य व संचालक हैं। मामला पुलिस को सौंपने के लिए संबंधित विभाग जांच पड़ताल कर रहा है।
यह है मामला
पाली विकासखंड क्षेत्र के बतारी ग्राम स्थित निजी विद्यालय के संचालक एस. तिवारी व प्राचार्य ए.के. तांडिया हैं। यहां दसवीं कक्षा में बच्चों को प्रवेश दिया गया था, पर विद्यालय को माध्यमिक शिक्षा मंडल ने मान्यता नहीं दी। इसलिए १५ बच्चों को प्रवेश पत्र जारी नहीं हुए और वे परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो गए। ग्राम बोइदा में संचालित आदर्श ज्ञानदीप विद्यालय का संचालन जेआर पटेल करते हैं। यहां 3 बच्चों को प्रायोगिक परीक्षा में शामिल नहीं होने से प्रवेश पत्र से वंचित कर दिया गया। इन बच्चों को उतरदा परीक्षा केंद्र में शामिल होना था, पर इनका साल बर्बाद हो गया।
आनन फानन में शुरू हुई जांच
यह जानकारी होते ही शिक्षा विभाग में हलचल मच गई और परीक्षा कार्य में जुटे अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए। आनन-फानन में संचालकों को जिला शिक्षाधिकारी के. एस. तोमर ने जिला कार्यालय तलब कर कलेक्टर अशोक अग्रवाल के समक्ष पेश किया। बतारी स्कूल संचालक एस. तिवारी ने कहा कि उन्होंने परीक्षा शुरू होने के एक दिन पहले तक मान्यता के लिए प्रयास किया, पर वे सफल नहीं हो पाए।
इसलिए अन्य केंद्रों में बच्चों को शामिल भी कराने का मौका नहीं मिला। बोइदा स्कूल संचालक जेआर पटेल ने कहा कि एक बच्च 6 माह से अनुपस्थित है, इसलिए प्रवेश पत्र नहीं आया। वहीं दो छात्रों द्वारा फार्म भरने के बाद प्रेक्टिकल व सैद्धांतिक परीक्षा में शामिल होने में रुचि नहीं लेने की बात कहकर बचने का प्रयास करता रहा। इससे पहले बोतली स्कूल के 42 बच्चे परीक्षा से वंचित हो गए थे।