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मंत्री को कहा घोटालेबाज

जयपुर. तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पिछले दिनों चर्चा में आए वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रतापसिंह सिंघवी को घोटालेबाज कहने पर राज्य विधानसभा में सोमवार को भारी हंगामा हुआ। विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हो गए। आरोप लगाने वाले कांग्रेस विधायक ने उपाध्यक्ष के कक्ष में खेद प्रकट किया, तब मामला शांत हुआ। इससे पहले सिंघवी को घोटालेबाज कहने वाले कांग्रेस विधायक भरतसिंह को शेष अवधि के लिए निलंबन का प्रस्ताव आ गया। बाद में निलंबन वापस ले लिया गया।

मामला क्या था : प्रश्नकाल के दौरान भरतसिंह ने कोटा की सांगोद पालिका अध्यक्ष पद पर कार्यभार का मामला उठाते हुए स्वायत्त शासन मंत्री से जानना चाहा कि ओबीसी महिला का कार्यभार सामान्य वर्ग के पुरूष को क्यों दिया गया। इसके जवाब में स्वायत्त शासन मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने बताया कि देवकीनंदन नामक जिस व्यक्ति को अध्यक्ष का चार्ज दिया गया है, वह सामान्य वर्ग का नहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं।

इस मामले की जांच कलेक्टर को सौंपी गई है। एसडीओ स्तर के अधिकारी को संशोधित नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण गलती हो गई थी। अब तक अध्यक्ष का काम देख रहे देवकीनंदन को हटा दिया गया है।

फिर आया निलंबन का प्रस्ताव

सिंह के सिंघवी की ओर बढ़ने का सत्तापक्ष ने कड़ा विरोध किया। मंत्रियों के कड़े विरोध को देखते हुए कुछ कांग्रेसी सदस्य नारेबाजी करने लग गए। इसी दौरान मुख्य सचेतक महावीरप्रसाद जैन ने भरतसिंह को सदन की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा, जो शोरशराबे में पारित हो गया।

ऐसे निबटा मामला

गतिरोध दूर करने तीन बार विधानसभा उपाध्यक्ष के कमरे में बैठक हुई। सत्ता और विपक्ष दोनों अड़े रहे। बाद में भरतसिंह ने विधानसभा उपाध्यक्ष के कमरे में खेद व्यक्त किया और उपाध्यक्ष ने इसकी जानकारी सदन को दी।

विवाद कैसे बढ़ा

मंत्री के जवाब से अंसतुष्ट भरतसिंह ने जानना चाहा कि गलती की कोई जांच हुई है। यदि हुई है तो किस अधिकारी को दोषी माना गया है। इसी बीच वन राज्यंमंत्री प्रतापसिंह सिंघवी ने स्वायत्त शासन मंत्री सुरेन्द्र गोयल को कुछ कहा तो भरतसिंह ने गोयल को कहा कि आपके पड़ोस में बैठे मंत्री (सिंघवी) घोटाले के लिए चर्चित रहे हैं। घोटाले के कारण ही उन्हें हटाया गया है। यह सब काम उन्हीं के इशारों पर हुआ है।

सिंघवी-सिंह आमने सामने

भरतसिंह के आरोप से नाराज सिंघवी ने कहा कि आपकी सरकार में भी तीन विभागों के मंत्री बदले गए थे, क्या वे भी घोटालों के कारण बदले गए। सिंघवी ने आरोप लगाया कि आपने अनुसूचित जाति के लोगों की जमीनों पर कब्जे कर रखे हैं। आपके घर के आगे से आज भी अनुसूचित जाति के लोग जूते हाथ में लेकर निकलते हैं। आपने इतना आतंक मचा रखा है। इससे भरतसिंह उत्तेजित हो गए और सिंघवी की ओर बढ़ते हुए वैल तक आ गए।





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