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Indians Abroad Indians Abroad मिलवॉकी
विदेशों में रहते भारतीयों ने अपनी संस्कृति को कुछ इस तरह पेश किया है कि विदेशी लोग न सिर्फ उसके बारे में जानना और सुनना चाहते हैं बल्कि उसे ग्रहण करने से भी गुरेज नहीं करते हैं। ऐसे ही एक महिला हैं डारलिन खालसा।
अमरीकी मूल होने के बावजूद वह अपने नाम के पीछे खालसा लगाती हैं। कॉनकोर्डिया यूनीवर्सिटी में वह इंटरनेशनल स्टूडेंट्स डिपार्टमेंट की डायरेक्टर हैं। विसकिंसन में पैदा हुई डारलिन को 1998 में उनकी योग्यताओं को देखते यूनीवर्सिटी में जॉब मिल गई थी। 2001 में गुजरात से आए छात्र जस्टिस खालसा को मिलने के बाद भारतीय संस्कृति से इतना प्रभावित हुईं कि न केवल उससे प्यार हुआ बल्कि दोनों ने शादी भी की।
शादी के बाद जब पहली बार भारत आईं तो यहां के लोग उनके दिलो-दिमाग पर छा गए। वापस जाकर उसने यूनीवर्सिटी के लिए भारत से संपर्क मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए जो सफल भी रहे। वह भारत में बेंगलूर, हैदराबाद, पंजाब, दिल्ली, मुंबई, देख चुकी हैं।
अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब जाकर उन्हें बहुत शांति मिलती है। उनका कहना है कि वह हर रविवार और वीरवार को विसकिंसन गुरुद्वारा जाना नहीं भूलती।