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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
रेलवे में एक अत्याधुनिक ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) तैयार किया गया है, जिससे चालक की असावधानी से होने वाली दुर्घटनाएं टाली जा सकेंगी। इसके तहत रेल पटरियों के बीच व इंजनों में विशेष उपकरण लगाए जाएंगे। प्रयोग बतौर नई दिल्ली और आगरा कैंट के बीच इस सिस्टम की ट्रायल हो रही है। सफल होने पर इसका लाभ अन्य रेलवे स्टेशनों को भी मिल सकेगा।
देश में होने वाली रेल दुर्घटनाओं में जनहानि के साथ बड़ी मात्रा में आर्थिक हानि भी होती है। रेलवे ट्रेन दुर्घटनाएं रोकने के लिए लंबे समय से योजनाएं बनाने में जुटी हुई है। उसी के तहत देश भर में टीपीडब्ल्यूएस लगाने का निर्णय हुआ है।
नई दिल्ली व आगरा कैंट के बीच सबसे पहले इसका उपयोग किया जा रहा है। नई दिल्ली व पलवल के बीच पहले चरण का काम हो चुका है। ट्रेनों की आपस में भिडं़त न हो, इसके लिए रेल पटरियों के बीच व बिजली चलित इंजनों में उपकरण लगाए जा रहे हैं। यह काम एक कंपनी के माध्यम से हो रहा है।
योजना के मुताबिक, 200 किलोमीटर के रेल खंड पर प्रत्येक स्टेशन व रेल फाटक के सिग्नल के नजदीक सिस्टम को लगाया जा रहा है। रेलवे ने अभी 580 सिग्नल इस सिस्टम से कवर करने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही बिजली चलित 35 इंजनों में सिस्टम को लगाया जाएगा। इस पर करोड़ों रुपए खर्चा होंगे। नई दिल्ली से आगरा कैंट के बीच जहां-जहां सिस्टम सफलतापूर्वक लग चुका है। वहां ट्रायल का काम चल रहा है।
इन दिनों मडगांव (गोवा) जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस का रैक मंगाकर आगरा कैंट- कोसीकलां के बीच ट्रायल ली जा रही है। यह ट्रायल छह मार्च तक चलेगी। इससे पहले दो इंजनों पर ट्रायल हो चुकी है। कुछ खामियां सामने आने पर उन्हें दूर कर दिया गया है। यदि रेलवे को सिस्टम पर सफलता मिलती है तो इसे आगे के रेल मार्ग पर भी लगाया जाएगा।
>> अभी दो सौ किलोमीटर के रेल खंड पर टीपीडब्ल्यूएस लगाया जा रहा है। इससे ट्रेन दुर्घटना रोकने में काफी मदद मिलेगी। इन दिनों ट्रायल चल रही है। सफलता मिलते ही सिस्टम को चालू कर दिया जाएगा।
बीपी पांडे, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद
ट्रेन दुर्घटनाएं एक नजर में
वर्ष 1995 में फिरोजाबाद के पास दो ट्रेनें टकराईं, 300 यात्री मरे।
वर्ष 1998 में लुधियाना के पास दो ट्रेनें टकराईं। इसमें 200 यात्री मरे।
वर्ष 1999 में भायसल के पास दो ट्रेनें टकराईं, 400 की मौत।
वर्ष 2005 बुंदेलखंड एक्सप्रेस केबिन में भिड़ी, 13 यात्रियों की मौत।
ऐसे काम करेगा टीपीडब्ल्यूएस
सिग्नल के बीच में एक उपकरण लगेगा। दूसरा उपकरण और स्क्रीन इंजन पर लगाई जाएगी। आधुनिक तकनीकी के माध्यम से सिग्नल की वर्तमान स्थिति की सूचना स्क्रीन पर डिस्प्ले होगी। उसी के मुताबिक चालक ट्रेन को चलाएगा।
यदि चालक सिग्नल से भेजी जा रही सूचना को नजरअंदाज करता है तो करीब 1200 मीटर की दूरी पर इंजन का पूरा सिस्टम स्वत: बंद हो जाएगा और ट्रेन सिग्नल के पहले अपने आप खड़ी हो जाएगी। इससे आगे खड़ी ट्रेन से भिडं़त या फिर ट्रेन पलटने से बच जाएगी।