विकास मंत्र. अगर आप हार के बारे में सोच रहे हैं, तो आप ऐसे विचारों को तत्काल अपने दिमाग से बाहर निकाल दें। कारण, अगर आप हार के बारे में सोचेंगे तो हार जाएंगे। इसकी बजाय यह रवैया अपनाएं, ‘मैं हारने में विश्वास नहीं करता।’ ऐसे बहुत से लोग हुए हैं, जिन्होंने इस सिद्धांत पर अमल कर बहुत अच्छे परिणाम हासिल किए। बस, सकारात्मक विचार अपनाते हुए आगे बढ़ें तो आप भी उस ‘हार’ को हरा सकते हैं, जो आपको वर्तमान में अवश्यंभावी लग रही होगी।
इस क्रम में एक व्यक्ति का किस्सा सुनाता हूं, जो ‘बाधापुरुष’ के नाम से मशहूर था। उसे यह नाम इसलिए दिया गया था, क्योंकि चाहे कोई भी सुझाव दिया जाए, उसका मस्तिष्क तत्काल उससे जुड़ी सारी बाधाओं के बारे में सोच लेता था। परंतु एक दिन उसे अपनी टक्कर का आदमी मिल ही गया और उसने ऐसा सबक सिखाया कि उसका नकारात्मक दृष्टिकोण ही बदल गया। हुआ यों कि एक दिन उसकी फर्म के निर्देशक एक योजना बना रहे थे, जिसमें काफी पूंजी लगनी थी। उस योजना में कुछ जोखिम भी थे और ‘बाधापुरुष’ ने अपनी आदत के अनुरूप जैसे बोलना शुरू किया, वहां बैठे एक अन्य व्यक्ति ने उन्हें रोक दिया।
वह व्यक्ति ‘बाधापुरुष’ से बोला, ‘आप हमेशा बाधाओं की ही बात क्यों करते हैं, संभावनाओं की बात क्यों नहीं करते?’ इस पर ‘बाधापुरुष’ ने जवाब दिया कि ‘समझदार होने के लिए यथार्थवादी होना जरूरी है।’ इस पर उस व्यक्ति ने कहा, ‘बेटा, मैंने पूरी जिंदगी बाधाओं को हटाने में गुजार दी। मैंने पाया है कि अगर आपमें विश्वास हो, साहस हो और काम करने की इच्छा हो तो ऐसी कोई बाधा नहीं जिसे हटाया न जा सके। साथ ही मेरा मानना है कि मैं ईश्वर की मदद से सारे काम करता हूं, क्योंकि वही मुझे शक्ति देते हैं।’ इसके बाद ‘बाधापुरुष’ ने कभी शंका प्रकट नहीं की यानी बाधा से डरो मत। ईश्वर आपके साथ है, जिसकी मदद से आप हर बाधा का सामना कर सकेंगे।