भोपाल. छोटे और सीमांत किसानों के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री द्वारा किया गया 50 हजार करोड़ रुपयों की कर्जमुक्ति का वादा मध्यप्रदेश के किसानों के जीवन में बहार नहीं ला सकेगा। वजह है, उनका करीब आधा कर्ज, जिसे बैंकों, सहकारी संस्थाओं जैसे कर्जदाताओं की बजाए सेठों, साहूकारों ने दिया है।
यह है पेंच: वित्तमंत्री के बजट भाषण के मुताबिक केवल संस्थागत ऋण ही माफ किए जाएंगे। दूसरी तरफ, खेती की खस्ता हालत से प्रभावित होने वाले अधिकतर छोटे और सीमांत किसान ही हैं। बड़े किसानों को दस हजार करोड़ रुपयों से कर्ज के 25 प्रतिशत की माफी तब मिलेगी, जब वे अपने कर्जे का 75 प्रतिशत जमा कर देंगे। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के अनुसार मध्य प्रदेश के 37 लाख 75 हजार 934 छोटे (एक से दो हेक्टेयर) और सीमांत (एक हेक्टेयर से कम) किसानों पर 4029.54 करोड़ रुपयों का कर्ज है।
इसमें से करीब आधा, 2335 करोड़ रुपयों का कर्ज संस्थागत है। राज्य के कुल 63 लाख से अधिक किसान परिवार करीब नौ हजार करोड़ के कर्ज तले दबे हैं। यानी एक किसान परिवार पर औसतन 14 हजार 218 रुपयों का कर्ज है।जीन केंपेन, दिल्ली की निदेशक डॉ. सुमन सहाय ने भास्कर को बताया कि कर्जमाफी के बजट प्रस्ताव में गैर-संस्थागत कर्जे का निपटारा न होने से अधिकतर किसानों को विशेष लाभ नहीं होगा।
राज्य के असिंचित और पठारी इलाकों में जमीन अनुत्पादक है, लेकिन वहां कृषि जोतों का रकबा कर्जमुक्ति के लिए निर्धारित दो हेक्टेयर से अधिक है। झाबुआ, धार, बड़वानी, खरगोन और खंडवा जैसे जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में किसान दस एकड़ का मालिक होने के बावजूद सालभर का अनाज तक पैदा नहीं कर पाता। ऐसे किसानों की कर्जमुक्ति के बारे में वित्तमंत्री मौन हैं, लेकिन सबसे अधिक आर्थिक बदहाली इन्हीं को भुगतनी पड़ रही है।
कृषि अर्थशास्त्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुनील के मुताबिक पिछले तीन सालों से सूखे से प्रभावित बुदेलखंड का इलाका भारी कर्जे के दबाव में है। कृषि रकबा सीमा से अधिक होने के कारण कर्जमुक्ति की घोषणा से इन्हें कुछ लाभ होगा, इसमें शंका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के वर्गीकरण पर भी असंतोष है। दो हेक्टेयर से अधिक के किसानों को तब 25 प्रतिशत कर्जमुक्ति का लाभ मिलेगा, जब वे अपने कर्जे का 75 प्रतिशत जमा कर देंगे। सुनील का कहना है कि छोटे, सीमांत और बड़े किसानों का वर्गीकरण बेमानी है। राज्य और केंद्र की कृषि नीतियों के कारण आज सभी किसान संकट में हैं।
-वित्तमंत्री ने अभी केवल बजट भाषण में कर्जमुक्ति की घोषणा की है। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी और फिर योजना बनेगी। घोषणा से स्पष्ट नहीं है कि कैसे, किन कर्जे को माफ किया जाएगा।
- प्रवेश शर्मा, प्रमुख सचिव, कृषि।