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चुटकी में होगी पार्किग

इंदौर. i तेजी से बढ़ता शहर और उतनी ही तेजी से बढ़ते वाहन लेकिन पार्किग उतनी ही। शहर की प्रमुख सड़कें पार्किग में तब्दील हो गई फिर भी जगह नहीं मिलती। उधर, शहर के इंजीनियर विदेश में ऑटोमेटिक पार्किग सिस्टम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

दुबई में ऐसे ही प्रोजेक्ट पर काम कर रहे इंदौर के इंजीनियर दिलीप कवठेकर बताते हैं इस प्रोजेक्ट में कम समय और कम जगह में हजारों गाड़ियां पार्क की जा सकेंगी। कई महानगरों में ऐसे प्रोजेक्ट आ चुके हैं लेकिन इंदौर में गाड़ियों के मैनेजमेंट को लेकर कोई विशेष योजना नहीं बन पाई है। निगम और आईडीए पार्किग के लिए जो प्रोजेक्ट ला रहे हैं उनमें भी समस्या को पूरी तरह से हल करने के इंतजाम नहीं।

ऐसे काम करेगा ऑटोमेटिक कार पार्किग सिस्टम

श्री कवठेकर के मुताबिक ऑटोमेटिक कार पार्किग सिस्टम दुबई के शॉपिंग मॉल के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें स्ट्रक्चर स्टील से बनी होगी जिससे पार्किग के लिए ज्यादा से ज्यादा जगह का उपयोग होगा। इस सिस्टम में एक प्लेटफॉर्म पर गाड़ी रखी जाती है। वहां से कन्वेयर के माध्यम से लिफ्ट में जाकर अंडरग्राउंड पार्किग में सैट हो जाती हैं। इसमें गाड़ी रखने या बुलाने के लिए एक कार्ड का इस्तेमाल किया जाता है। शहर में भी ऐसे प्रोजेक्ट आएं तो पार्किग समस्या हल हो सकती है। ये सिस्टम छोटे और बड़े दोनों स्तर पर काम करते हैं। 50 से 5000 गड़ियां इनमें पार्क की जा सकती हैं। यों तो प्रोजेक्ट काफी महंगा लगता है लेकिन इससे बचने वाली जगह का व्यवसायिक उपयोग किया जा सकता है।

शहर में भी 20 बहुमंजिला पार्किग प्रस्तावित

शहर में बढ़ती पार्किग समस्या के मद्देनजर नगर निगम 20 बहुमंजिला पार्किग सिस्टम ला रहा है। आर्किटेक्ट और प्रोजेक्ट कंसल्टेंट बीआरटीएस हितेंद्र मेहता के मुताबिक इन सिस्टम में इमारत की हर मंजिल पर पार्किग सुविधा रहेगी। लिफ्ट से भी पार्किग की जा सकेगी। वैसे सुभाष चौक में बहुमंजिला पार्किग बना है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना भी इसका हल है। ऑटोमेटिक सिस्टम बेहतर विकल्प है लेकिन काफी महंगा है इसलिए शहर में लागू होना मुश्किल है।

50 प्रतिशत जगह का ही उपयोग

सामान्य पार्किग सिस्टम में गाड़ी लाने-ले जाने के लिए भी जगह छोड़ना पड़ती है। इसमें 50 प्रतिशत जगह का ही उपयोग पार्किग के लिए हो पाता है। ऑटोमेटिक पार्किग सिस्टम में आने-जाने की जगह आधी ही लगती है। छोटी होटल या बड़ी रहवासी इमारतों के लिए छोटे पार्किग सिस्टम बनाए जा सकते हैं।

चालान बनाने का हक नहीं है पुलिस को

मुंबई, पुणो और बैंगलुरू जैसे शहरों में प्रशासन पार्किग के लिए आधुनिक योजनाओं पर काम कर रहा है वहीं इंदौर में अभी तक ऐसी कोई योजना क्रियान्वित नहीं की गई। शॉपिंग मॉल, टाउनशिप और इमारतें तो बन रही हैं पर पार्किग पर्याप्त नहीं। व्यवसायी मनीष सेंध के मुताबिक जेलरोड इतना बड़ा बाजार है पर पार्किग की जगह नहीं। जो जगह उपलब्ध है उस पर भी नियम बदलते रहते हैं। लोहा व्यवसायी आनंद गोयल ने कहा बाजार जाओ तो गाड़ी कहां लगाएं समझ ही नहीं आता। गलत जगह पार्किग कर दें तो ट्रैफिक पुलिस वाले आ जाते हैं।





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