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गजब के लीडर हैं धोनी

dhoniत्रिकोणीय सिरीज में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद इरफान पठान ने जो कुछ कहा उससे पता लगता कि भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का दिमाग और उनकी शैली किस तरह की है।

पठान ने ईएसपीएन ने से कहा, जब मैं आखिरी ओवर डालने जा रहा था तो धोनी ने मेरी पीठ थपथपाने के बाद मुस्कुराकर कहा कि मैं जानता हूं कि तुम इतने गए गुजरे गेंदबाज नहीं हो जो इस ओवर में तीन बाउंड्री दे दो।

इसके बाद पठान ने इसी ओवर में दो विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की जीतने की उम्मीदों को खत्म कर दिया। माही किस तरह अपनी टीम को प्रोत्साहित करते हैं यह उसकी आधी कहानी ही है। दूसरा अद्धांश तो और भी अहम है जो यह बताता है कि उन्हें अपने खिलाड़ियों में किस कदर विश्वास है।

पठान पहले स्पेल में खासे महंगे साबित हुए। इसके बाद भी धोनी ने उन्हें अंत के ओवरों के लिए सुरक्षित रखा क्योंकि वे श्रीसंथ और प्रवीण कुमार की तुलना में अधिक अनुभवी हैं। इसलिए अंतिम ओवर का दबाव वे बेहतर ढंग से झेल सकते हैं।

इस पूरी सिरीज में उन्होंने आउट ऑफ फार्म चल रहे युवराज सिंह का पूरा सपोर्ट किया। हालांकि दोनों फाइनलो में युवी ने कोई बड़ी पारी नहीं खेली, लेकिन उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान दिया।

यह भी सच नहीं है कि धोनी संकट की घड़ी में केवल अनुभवी खिलाड़ियों पर ही भरोसा करते हैं।

याद किजीए ट्वंटी20 विश्वकप का फाइनल जब उन्होंने जोगिंदर शर्मा से अंतिम ओवर फिकवाया था। यह सब धोनी की लीक से हटकर क्रिकेटिंग सोच का परिचायक है। वे खेलते तो क्रिकेट के नियमों के अनुसार ही हैं। लेकिन एक लीडर के रूप में वे निडर और गजब के दृढ़ निश्चयी हैं। उनकी सफलता का यही सबसे बड़ा कारण है।

पिछली बार सीसीआई के स्टेडियम में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ट्वंटी20 मैच में हराया था। उस समय मैं और धोनी एक ही रेस्तारा में थे। तब मैंने उनसे पूछा था कि पोंटिंग की टीम पर दूसरी जीत और भावी टूर में सफलता के लिए उनका मूलमंत्र क्या होगा।

इसके जवाब में धोनी ने कहा कि उन्हें मैदान में मात देने के लिए आपको पहले उनसे मानसिक लड़ाई जीतनी होगी।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत के लिए आपको अपने मन में छिपे डर को बाहर निकालना होगा। हम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सालों से खेलते आ रहे हैं, लेकिन अब इस तरह नहीं खेलेंगे। धोनी ने कहा कि वे ब्रेट ली और रिकी पोंटिंग जैसे महान खिलाड़ियों को सम्मान देने के हक में नहीं हैं। वे ली की गेंद पर छक्का और पोंटिंग को 0 पर आउट होते देखना चाहते हैं।

बेशक उस ट्वंटी20 मैच में जीत के बाद धोनी आसमान पर थे, लेकिन उनकी आंखों की चमक देखकर यह साफ था कि उन्होंने जो कुछ भी कहा उसमें काफी गहराई थी। वे अपना काम बखूबी जानते हैं। इसके बाद कई मौकों पर अब इस सिरीज में उन्होंने इस बात को साबित किया है।

गांगुली और द्रविड़ को वन डे टीम से बाहर रखने के उनके निर्णय से कई लोगों की त्यौरियां चढ़ गइर्ं थी। युवी के प्रति उनके अंध समर्थन से आलोचकों को पक्षपात की बू आने लगी थी। तो जिस तरह सये उन्होंने गेंदबाजी और बल्लेबाजी के क्रमों में परिवर्तन किया उससे उनकी शैली को कटघरे में खड़ा किया गया।

अंत में सीबी सिरीज में भारत की जीत से सब खामोश हो गए। धोनी को छह माह पहले अचानक कप्तानी थमाए जाने के बाद से भारतीय टीम ने ट्वंटी विश्वकप और अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीबी सिरीज में यादगार जीत दर्ज की।

मुझे याद नहीं कि किसी भारतीय कप्तान ने इतने से समय में इतनी उपलब्धि अर्जित की हो।

आज झारखंड जैसे पिछड़े राज्य आने वाले और रेलवे में बतौर टिकिट कलेक्टर अपना कैरियर प्रारंभ करने वाले धोनी ने एक यादगार लंबा सफर तय कर लिया है। इसीलिए आज यह क्रिकेट का दिवाना देश उनके पीछे पागल हुआ जा रहा है।





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harish kumar
Thursday, 6th Mar 2008, 5:21
Ms dhoni is great leader but Sourav ganguly is a great captain.