News
Metros
Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. पीजीआई के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट को इस साल और झटके लगने वाले हैं। डिपार्टमेंट की फैकल्टी में नाराजगी है और एक और डॉक्टर पीजीआई छोड़ने की तैयारी में है। इससे पहले पिछले पांच साल में इसी विभाग से पांच फैकल्टी मेंबर्स पीजीआई छोड़ चुके हैं।
वहीं, पीजीआई इसी साल अपना एडवांस्ट कार्डियक सेंटर शुरू करने की तैयारी में है। इसी साल अप्रैल में पीजीआई के इस डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर केके तलवार के रिटायरमेंट की उम्र पूरी हो जाएगी।
प्रोमोशन न होने को लेकर नाराज चल रहे पीजीआई के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश विजयवर्गीय ने भी पद छोड़ने का मन बना लिया है। पीजीआई का रवैया उनके प्रति ऐसा ही रहा तो वे इसी साल पद छोड़ देंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ. राजेश ने 2001 में एडहॉक पर असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में पीजीआई जॉइन किया था।
इस दौरान उन्होंने परमानेंट होने के लिए फॉर्म भरे, लेकिन दोनों बार इंटरव्यू नहीं हुआ। जुलाई 2005 में वे परमानेंट हो गए। उसके बाद पीजीआई ने एसोसिएट प्रोफेसर की एडवर्टाइजमेंट निकाली, जिसपर एक डॉक्टर को प्रोमोट किया गया, लेकिन इस डॉक्टर ने जॉइन नहीं किया।
उसके बाद हाल ही में पीजीआई ने अन्य पदों और भर्तियों के लिए एडवर्टाइजमेंट निकालकर इंटरव्यू लिए, लेकिन एसोसिएट प्रोफेसर के लिए एडवर्टाइजमेंट ही नहीं निकाली गई।
डॉ. राजेश को पीजीआई में एडहॉक पीरियड मिलाकर साढ़े सात साल का एक्सपीरियंस हो चुका है, लेकिन पीजीआई ने उनसे कम एक्सपीरियंस और डायरेक्ट अपॉइंटमेंट वाले एक डॉक्टर को प्रोमोट कर दिया। फिलहाल इस मामले में डॉ. राजेश ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
छोड़ गए डॉक्टर्स
पीजीआई के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में फैकल्टी की 12 पोस्ट हैं, जिनमें अभी 8 फैकल्टी मेंबर्स हैं। पीजीआई के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट को डॉ. अनिल ग्रोवर, डॉ. एचके बाली, डॉ. सुनील बनर्जी, डॉ. पुनीत और डॉ. मनदीप भार्गव पिछले पांच साल में छोड़ चुके हैं। पीजीआई का कहना है कि जो पद खाली पड़े हैं उनके लिए जल्द ही एडवर्टाइजमेंट निकाली जाएगी।
क्या कहती है फैकल्टी एसोसिएशन
पीजीआई फैकल्टी एसोसिएशन के वाइस प्रेजिडेंट डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि पीजीआई में ट्रांसपेरेंसी होनी जरूरी है। पीजीआई के रवैये और बर्डन के कारण डॉक्टर्स फ्रस्टेट होते हैं और छोड़कर जाते हैं। हम हमेशा से यही मांग करते आ रहे हैं कि पीजीआई में कोई पार्शियल्टी नहीं होनी चाहिए।
एडिशनल प्रोफेसर भी नाराज
पीजीआई के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. यशपाल शर्मा भी इस बात को लेकर नाराज चल रहे हैं, कि उन्हें प्रोफेसर पद पर प्रोमोट नहीं किया गया, जबकि पोस्ट खाली है। उनका कुछ महीने का एक्सपीरियंस कम पड़ता है, जिसके लिए पीजीआई रिलैक्सेशन दे सकता है और देता आया है। लेकिन इस मामले को पीजीआई ने कंसीडर ही नहीं किया। यह मामला गवर्निग बॉडी की बैठक में भी ढंग से प्रेजेंट नहीं किया गया।