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Shivaratri Shivaratri प्रकृति यानी शक्ति सक्रिय है। शिव से उनकी शक्ति को निकाल दिया जाए, तो शिव, शव के समान हो जाएंगे। चूंकि उनका मूल भाव निष्क्रियता का है, अत: शक्ति के बिना वह हिल भी नहीं सकते। जब हम बहुत साधारण रूप में यह कहते हैं कि आज तो हिलने की भी शक्ति नहीं बची हममें, तो दरअसल हम शिव और शक्ति के मेल से बने मुहावर का प्रयोग करते हैं। शिव की एक-एक क्रिया शक्ति से संचालित है। उठना, बैठना, सोचना, चलना और लड़ना आदि। अगर शक्ति न हो, तो शिव इनमें से कुछ नहीं कर सकेंगे। यानी पार्वती का उनके साथ रहना बहुत ज़रूरी है। आपको शिव कभी अकेले नहीं दिखेंगे,किसी तस्वीर में भी नहीं। लिंग-रूप में भी उनके साथ पार्वती यानी शक्ति मौजूद हैं। लिंग के आधार के रूप में। जिन तस्वीरों में शिव अकेले खड़े हैं, उनमें उनके वस्त्र, अस्त्र व जटा से निकलती गंगा की धार दिखती है। यह भी उनकी शक्ति ही है। शिव की व्यक्त यानी प्रकट शक्ति है पार्वती और अव्यक्त शक्तियां हैं ये सब। तो सवाल यह उठता है कि जिस समय सती के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे और पार्वती अभी अपने पिता के यहां जन्मी ही थीं, तब से लेकर पार्वती से शिव के विवाह के समय क्या शिव निष्क्रिय हो गए थे?