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शिवरात्रि और जागरण का महत्व

हमारे देश में शिवरात्रि का पर्व हर वर्ष मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त, शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बेल-पत्र आदि चढ़ाते, पूजन करते, उपवास करते तथा रात्रि को जागरण करते हैं। शिवलिंगपर बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास तथा रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म की ओर इशारा करता है।

शिवरात्रि का रहस्य

इस दिन शिव की शादी हुई थी इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है। वास्तव में शिवरात्रि का परम पर्व स्वयं परमपिता परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की स्मृति दिलाता है। यहां ‘रात्रिज् शब्द अज्ञान अन्धकार से होने वाले नैतिक पतन का द्योतक है। परमात्मा ही ज्ञान सागर है जो मानव मात्र को सत्य ज्ञान द्वारा अन्धकार से प्रकाश की ओर अथवा असत्य से सत्य की ओर ले जाते हैं।

शिवरात्रि पर सच्चा उपवास यही है कि हम परमात्मा शिव से बुद्घि योग लगाकर उनके समीप रहे। उपवास का अर्थ ही है उपवास अर्थात समीप रहना। जागरण का सच्च अर्थ भी काम, क्रोध आदि पांच विकारों के वशीभूत होकर अज्ञान रूपी कुम्भकरण की निद्रा मे सो जाने से स्वयं को सदा बचाए रखना है। शिवरात्रि के पर्व पर जागरण का महत्व है। तो आइए, हम सब इस आध्यात्मिक महत्व को जानकर शिवरात्रि को सार्थक मनाएं।

अनेक नाम

हिन्दू धर्म में भगवान शिव को अनेक नामों से पुकारा जाता है

रूद्र - रूद्र से अभिप्राय जो दुखों का निर्माण व नाश करता है।

पशुपति - भगवान शिव को पशुपति इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह पशु पक्षियों व जीवआत्माओं के स्वामी हैं

अर्धनारीश्वर - शिव और शक्ति के मिलन से अर्धनारीश्वर नाम प्रचलित हुआ।

महादेव - महादेव का अर्थ है महान ईश्वरीय शक्ति।

भोला - भोले का अर्थ है कोमल हृदय, दयालु व आसानी से माफ करने वाला। यह विश्वास किया जाता है कि भगवान शंकर आसानी से किसी पर भी प्रसन्न हो जाते हैं।

लिंगम - यह रोशनी की लौ व पूरे ब्रrांड का प्रतीक है।

नटराज - नटराज को नृत्य क ा देवता मानते है क्योंकि भगवान शिव तांडव नृत्य के प्रेमी हैं।शान्ति नगर स्थित शिवशक्ति दुर्गा मंदिर के पं. सोहनानंद जी महाराज ने बताया कि शिवरात्रि को रात्रि में चार बार हर तीन घंटे बाद रुद्राभिषेक किया जाता है। इससे जातक का कालसर्प दोष व सभी गृहदोष दूर हो जाते हैं।

ब्रह्माकुमारी प्रेमलता, चरखी दादरी





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