कैंब्रिज(अमेरिका). दुर्घटनाओं या घातक बीमारियों के कारण पैर का निचला हिस्सा गंवा चुके लोगों के लिए मैसेच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलोजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों की नई खोज वरदान साबित होगी। ‘एमआईटी’ के अनुसंधानकर्ताओं ने दुनिया का पहला रोबोट रूपी ‘टखना’ बनाने में सफलता हासिल की है।
एमआईटी के वैज्ञानिकों के अनुसार रोबोट की तरह यांत्रिक रूप से काम करने वाला यह टखना व्यक्ति को थकान महसूस नहीं होने देता, शरीर को पूरी तरह संतुलित रखता है और कृत्रिम अंगों के मुकाबले बेहतर चाल देता है।
‘एमआईटी मीडिया लैब’ के अंतर्गत पूरी की गई इस परियोजना का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर ह्यूग हर और उनके दल के अनुसार इस यांत्रिक टखने की सबसे बड़ी खासियत है कि यह दूसरे कृत्रिम अंगों के बजाय बेहद हल्का और ज्यादा लचीला है।
अपने दोनों पैर गंवा चुके प्रोफेसर ह्यूग ने इस यांत्रिक टखने के इस्तेमाल का प्रदर्शन करते हुए कहा, ‘‘सामान्य कृत्रिम टखने के मुकाबले इस रोबोट रूपी टखने में शरीर को आगे धकेलने की तीन गुना शक्ति है। ऐसा पहली बार है कि कोई यांत्रिक अंग पूरी तरह से इंसानी चाल दे सकता है।’’