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Woman's Day Woman's Day इंदौर. जिन मंदबुद्धि बच्चों को समाज उपेक्षा या दया के भाव से देखता है, उन बच्चों के लिए पूरा जीवन समर्पित कर उन्हें मातृवत स्नेह देना कोई आसान काम नहीं। इसके लिए चाहिए, अद्भुत ममतमयी ह्रदय और सेवा का एकनिष्ठ भाव।
इन्हीं दो गुणों का समन्वय है, सीमा परिहार। सीमा जी ने इन्दौर के सुदामा नगर क्षेत्र में संकल्प अनुसंधान एवं पुनर्वास संस्थान की ओर से सूरज निकेतन की स्थापना की।
समाज में कई ऐसे बच्चे होते हैं जिनके पास ईश्वर प्रदत्त बुद्धि कम होती है। यदि उन्हें उचित सहायता न मिले तो वे ताउम्र पराश्रित और लाचार बने रहते हैं। सीमा जी ने इस दर्द को समझा। ऐसे बच्चों के लिए वास्तव में कुछ करने की चाहत शुरू से मन में थी।
आखिर शादी के 10 साल बाद सीमा जी ने भोपाल से डिप्लोमा इन स्पेशल एज्युकेशन इन मेंटल रिटार्डेशन का कोर्स किया और विधिवत इस क्षेत्र में कदम रखा।
सूरज निकेतन के रूप में उनका सपना साकार हुआ और यह स्थान कई परिवारों और उनके खास बच्चों के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। बिना किसी दान-अनुदान के चलने वाली यह संस्था अभिभावको से भी नाममात्र का शुल्क लेती है, वह भी सक्षम हों तो।
यहां छह से पच्चीस वर्ष तक के सुबह 11 बजे से अपरान्ह 4 बजे तक विविध प्रशिक्षण लेते हैं। पर मुख्य तौर पर उन्हें सिखाया जाता है दैनिक कामों में आत्मनिर्भता और व्यवहार-ज्ञान। इन बच्चों को सीखाना अत्यंत दुष्कर कार्य है, क्योंकि कई बार दोहराने पर भी वे समझ नहीं पाते हैं या याद नहीं रख पाते हैं। ये बच्चे ज़िद्दी भी बहुत होते हैं, कई बार ये हिंसक भी हो जाते हैं। अत: इनके साथ काम करने के लिए व्यक्ति में बहुत धैर्य और अथक परिश्रम की दरकार होती है।
सीमाजी ने ऐसी मुश्किल स्थितियों से निपटने के लिए बहुत कारगर तरकीब ढूंढ निकाली है। जब बच्चे बेकाबू होने लगते हैं तो वे शांत भाव से कहती हैं कि कल से उन्हें स्कूल नहीं आने दिया जाएगा और बच्चे चुपचाप उनका कहा मान लेते हैं।
यह एक बात सिद्ध करती है कि बच्चों के लिए स्कूल क्या महत्व रखता है और बच्चे उसे कितनी गंभीरता से लेते हैं। बच्चों का स्कूल और सीमाजी के प्रति लगाव इससे ही ज़ाहिर होता है कि गर्मियों की छुट्टियों में भी बच्चे यहां आने की Êिाद करते हैं और हारकर अभिभावकों को उन्हें लाना ही पड़ता है। रक्षाबंधन के समय इन बच्चों को राखी बनाने, दीपावली पर मिट्टी के दिए और गीट्रिंग-कार्ड बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। 2004 में उनकी संस्था को सर्वश्रेष्ठ सामाजिक संस्था का पुरस्कार मिला। सीमाजी भविष्य में इन बच्चों को रोजगार मूलक प्रशिक्षण देने की योजना बना रही हैं।
सीमा परिहारइंदौर, मध्यप्रदेश
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