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Woman's Day Woman's Day भिवानी, हरियाणा. कुछ लोग चुपचाप अनवरत् परिश्रम की राह पर चलते रहते हैं। उनके लिए स्वयात्रा ही नहीं, दूसरों के लिए मार्ग प्रशस्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इमलोटा के कृषक परिवार में जन्मीं खजानी देवी ऐसी ही एक मिसाल हैं।
खजानी देवी ने वर्ष 1980 में गांव के ही शासकीय स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और महाराष्ट्र से सीपीएड का कोर्स कर वर्ष 1984 में हरियाणा के ग्रामीण विद्यालय में पीटीआई का कार्य ग्रहण किया।
खुद बैडमिंटन और टेबल-टेनिस की बहुत बढ़िया खिलाड़ी खजानी ने कभी सरकारी स्कूलों के माहौल व सुविधाओं का रोना रोने के बजाय ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों की विशेषताओं पर गौर किया। उन्होंने पाया कि उनमें गज़ब की इच्छशक्ति और क्षमता है। उन्होंने सातवीं और आठवीं कक्षा की लड़कियों की टीम बनाई। इस टीम ने उपमण्डल और जिला स्तर पर अनेक प्रतियोगिताओं में भाग लिया। पहले-पहल सफलता न के बराबर मिली, कारण लड़कियों में अनुभव की कमी और स्थितियां लड़कियों के खेल के अनुकूल न होना। स्कूल और अभिभावकों में लड़कियों के खेल के प्रति कोई रूझान नहीं था। उन्होंने पहले इस माहौल को सकारात्मक बनाने के लिए साथी शिक्षकों, छात्राओं और अभिभावकों से इस बारे में चर्चा शुरू की।
कठोर वातावरण धीरे-धीरे नर्म पड़ रहा था। लड़कियों के खेल और उनके प्रति व्यवहार में सुधार साफ नज़र आ रहा था कि वर्ष 1993 में खजानी देवी का तबादला राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (कन्या) झोझूकलां हो गया। ये अपेक्षाकृत बड़ा कस्बा था और थोड़ा प्रगतिशील भी। यहां काम करने के लिए ज्यादा संभावना थी। अत: उन्होंने प्रयोग के तौर पर दसवीं-ग्यारहवीं की लड़कियों की एक हैंडबॉल टीम गठित की।
लगातार दो वर्षो की कड़ी मेहनत के बाद वह दिन आया, जिसका खजानी देवी ने बरसों से सपना देखा था। उनकी टीम 1995 में जिला स्तर से लगातार जीतते हुए राज्य स्तर चैम्पियन बनी। खजानी देवी ने प्रण कर लिया था कि अब यह ट्रॉफी वे कहीं जाने नहीं देंगी। उनका दृढ़-संकल्प और कड़ी मेहनत रंग लाई। झोझूकलां की हैंडबॉल टीम 1995 से 2005 तक लगातार राज्य स्तर पर विजेता रही। पूरे देश में किसी टीम द्वारा बनाया यह अनोखा रिकॉर्ड है। खजानी देवी का अपनी छात्राओं के साथ गहरा जुड़ाव है। वे अनुशासन और एकाग्रता के साथ कड़े परिश्रम पर विश्वास करती हैं पर साथ ही छात्रों के प्रति पूरा भरोसा और स्नेह भी रखती हैं। इसी का नतीजा है कि उनके विद्यालय की कई छात्राएं विभिन्न प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहीं हैं।
कुश्ती में 19 वर्ष आयु समूह और 14 वर्ष आयु समूह में उनकी छात्राएं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण-पदक जीत चुकी हैं। इनमें गीता बलाली और बबीता बलाली चीन, जापान सहित कई एशियाई देशों में कुश्ती में धाक जमा चुकी हैं। हाल ही में उनकी हैंडबॉल टीम की एक खिलाड़ी उर्मिला दोहा में आयोजित एशियाड में भाग लेकर लौटी हैं।
गांव की प्रतिभाओं को निखारकर अन्तरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली खजानी देवी अत्यंत सादगी पसंद हैं। खजानी देवी देश की पहली महिला शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षक हैं जिन्हें 2006-2007 का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला। खजानी देवी आज भी शांत, निर्विकार भाव से अपने कार्य में संलग्न हैं। वह काम जो उनके लिए संकल्प है और दूसरों के लिए मिसाल।
खजानी देवी
झोझूकलां, हरियाणा
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