विकास मंत्र. अमेरिकी ग्रीन कार्डधारी मेरी खूबसूरत दोस्त तारा संपत को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बेंगलूरू शाखा में एक ड्राफ्ट बनवाने में 40 मिनट लगे। उन्होंने शिकायत की तो मैनेजर ने मुस्कराकर नफीस कन्नड़ में कहा, ‘थोड़ा एडजस्ट कर लीजिए।’ इंडियन एयरलाइंस की उड़ान के दौरान कैबिन में गंदगी देखकर मैंने एयर होस्टेस से शिकायत की। जवाब में उसने शिकायत व सुझाव फॉर्म लाकर दे दिया। एयर होस्टेस खेद व्यक्त नहीं करतीं।
फॉर्म लेते वक्त उसने इतना जरूर कहा, ‘यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है सर।’ अगले हफ्ते मैं जेट एयर की उड़ान में था। मेरा नंबर आते-आते नॉन-वेज खाना खत्म। मैंने शिकायत की, तो स्कर्ट पहने महिला ने माफी मांगी। फिर कैबिन इंचार्ज आईं, उन्होंने भी माफी मांगी। मैंने पाव-भाजी से संतोष कर लिया। अगले ही हफ्ते मैं सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान में था। राफल्स क्लास में सूप सर्व कर रही लड़की लड़खड़ाकर मेरे ऊपर आ गिरी।
मेरे कपड़ों पर सूप ही सूप था। मेरी त्योरियां चढ़ें, उससे पहले ही अगले हिस्से में ले जाकर मुझे गर्म तौलियों से बिल्कुल साफ कर दिया गया। फिर क्षमा याचनाओं का दौर शुरू हुआ। सच्ची क्षमा याचनाएं, पहले सिंगापुर की उड़ान बालाएं, फिर खुद पायलट। तभी चीफ स्टूवर्डेस मेरा नाप लेने लगी। मैं समझ गया हफ्ते-दो हफ्तों में मुझे नई पेंट-शर्ट मिलेगी। सिंगापुर में उतरते ही ट्रांजिट लाउंज में मुस्कराते चेहरों के साथ मुझे एक पार्सल दी गई। खोला तो बिल्कुल मेरे नाप और पहने हुए मिलते-जुलते रंग की पेंट-शर्ट उसमें थी।
संस्कृति के हिसाब से सेवा के पैमाने बदल जाते हैं। भारत में हाल तक कस्टमर सर्विस या ग्राहक की सेवा काफी मानी जाती थी। फिर कस्टमर सेटिस्फेक्शन या ग्राहक के संतोष की जागरूकता आई। अब कस्टमर डिलाइट या ग्राहक की खुशी का जमाना है। सिंगापुर एयरलाइंस में जो मेरे साथ हुआ, उसे कस्टमर एक्सटेसी या ग्राहक का परमानंद कहेंगे। हम इसके लिए तैयार हैं?
-लेखक प्रख्यात मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं।