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नौकरियों का बदलता परिदृश्य

संपादकीय. एक लोक-लुभावन बजट के बाद देश की अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। ऐसा होना स्वाभाविक भी है, जहां एक ओर हमारी आर्थिक विकास की गति संतोषजनक है, वहीं दूसरी ओर लगभग सभी क्षेत्रों में अपेक्षित विकास के संकेत लगातार दिख भी रहे हैं। इन सबके बीच एक महत्वपूर्ण मामला जिस पर हमारा ध्यान जाना चाहिए, वह है देश में नौकरियों की वस्तुस्थिति।

एक प्रतिष्ठित मानव संसाधन कंसल्टेंसी कंपनी के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार इस साल इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और संबंधित सेक्टरों व मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में नौकरियों की संख्या में भारी गिरावट आने की संभावना है। हमारी अर्थव्यवस्था के विकास के पीछे सेवा उद्योग का सबसे बड़ा योगदान है और यह भी दावा किया जाता है कि उत्पादन(मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है। पर इस नए सर्वेक्षण के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र नई नौकरियों के सृजन में पिछड़ रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार कई बड़ी कंप्यूटर और आईटी कंपनियां इस साल कैंपस रिक्रूटमेंट घटाने या न करने पर विचार कर रही हैं।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सबसे बड़ी गिरावट फर्नीचर निर्माण, खानपान की वस्तुओं और मेटल उत्पादों के क्षेत्रों में आने की संभावना है। एक और चिंताजनक बात जो सामने आती है वह इंजीनियरिंग स्नातकों में बेरोजगारी बढ़ने के संकेत हैं। इसके विपरीत अच्छी खबर यह है कि शिक्षा, प्रशिक्षण, कंसल्टेंसी, स्वास्थ्य सेवाओं और हॉस्पिटेलिटी (होटल, टूरिज्म और एयरलाइंस आदि) क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या में भारी वृद्धि होगी।

होटल, पर्यटन और स्वास्थ्य उद्योग में संभावित भारी निवेश के चलते इन क्षेत्रों में लाखों नौकरियां सृजित हो रही हैं या होने वाली हैं। कंपनी के सर्वेक्षण में यह संख्या होटल-पर्यटन क्षेत्र के लिए 4.2 लाख, स्वास्थ्य सेवाओं में 2.9 लाख और शिक्षा-कंसल्टेंसी में 1.6 लाख होने की उम्मीद है। ये सब लक्षण फिर से हमारी शिक्षा व्यवस्था की कमियों की ओर इशारा करते हैं। हमारे शिक्षण संस्थानों में अभी भी फॉर्मल डिग्री या डिप्लोमा देने वाले कोर्स चलाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि जरूरत ऐसे डिग्री या डिप्लोमाधारी युवाओं की है, जो तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में खाली जगहों को भर सकें।

सिर्फ बीए, बीएससी या बीई स्नातक तैयार करने से ज्यादा आवश्यक है कि पर्यटन, होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रशिक्षण या कंसल्टेंसी जैसे क्षेत्रों में उद्योग से जुड़े कोर्स तैयार किए जाएं। साथ ही उद्योग जगत को भी नए स्नातकों के लिए ट्रेनिंग या इंटर्नशिप जैसे मौके और अधिक संख्या में उपलब्ध कराने की जरूरत है, जिससे आने वाली नौकरियों के लिए ये युवा बेहतर तरीके से प्रशिक्षित हों।





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