जयपुर. जवाहर कला केंद्र की ओर से पिछले दिनों आयोजित राज्य स्तरीय लघु नाट्य लेखन प्रतियोगिता के पुरस्कृत नाटकों का चार दिवसीय समारोह गुरुवार को केंद्र के रंगायन ऑडिटोरियम में शुरू हुआ। पहले दिन बीकानेर, जयपुर और अलवर के पुरस्कृत तीन लघु नाटकों का मंचन किया गया। छोटे-छोटे इन नाटकों में छिपी बड़ी सोच ने नाट्यप्रेमियों को खासा आकर्षित किया।
शुरुआत बीकानेर के प्रमोद कुमार चमोली लिखित लघु नाटक ‘आशियाना’ से हुई। विपिन पुरोहित निर्देशित इस नाटक में बाल श्रमिकों की स्थिति को दर्शाया गया। जयपुर के डॉ. कुमार गणोश लिखित नाटक ‘इंद्रनीलमणि उर्फ हादसों की बरसियां होती हैं, जयंतियां नहीं’ का निर्देशन उदयपुर के वरिष्ठ रंगकर्मी रिजवान जहीर उस्मान ने किया। शैलेंद्र शर्मा अभिनीत एकल प्रस्तुति में बुढ़ापे के एकाकीपन से उपजने वाले हताशा के भावों को दर्शाया गया।
अलवर के प्रदीप कुमार लिखित नाटक ‘मुकदमा जारी है’ में पानी की कमी से भविष्य में पानी की जमाखोरी की समस्या को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। शुक्रवार को यहां जोधपुर के नरेंद्र मेहता लिखित ‘वो सुबह’, बीकानेर के हरीश बी. शर्मा लिखित ‘जगलरी’ और जयपुर की उत्तरांक्षी पारीक लिखित लघु नाटक ‘निर्णय’ का मंचन किया जाएगा।
‘फुल लैंथ’ नाटक की जरूरत : वरिष्ठ रंगकर्मी साबिर खान का कहना है कि जवाहर कला केंद्र को अब ‘फुल लैंथ’ नाटक लिखवाने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। गुरुवार को केंद्र में शुरू हुए पुरस्कृत लघु नाटकों के समारोह के अवसर पर आए साबिर खान ने पत्रकारों से कहा कि केंद्र द्वारा लघु नाटक खूब लिखवाए जा चुके हैं।‘फुल लैंथ’ नाट्य लेखन प्रतियोगिता आयोजित करने से रंग जगत को नए नाटक मिलेंगे जिससे इस क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार होगा।