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हाउसिंग बोर्ड पर भी शक

जयपुर. नगरीय विकास विभाग के फैसलों पर भौंहें टेढ़ी करने वाली ‘सरकार’ अब राजस्थान आवासन मंडल के फैसलों को भी शक की निगाह से देख रही है। फिलहाल राज्य सरकार ने गत 8 फरवरी की बोर्ड मीटिंग में किए गए कुछ फैसलों के अमल पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। अब हाउसिंग बोर्ड से इस बात की जानकारी मांगी गई है कि पिछले दो साल में किन-किन संस्थाओं को कितनी जमीन किस दर से आवंटित की गई।

नगरीय विकास विभाग के उपसचिव शिवकुमार अग्रवाल ने 3 मार्च को आवासन मंडल को तीन अलग-अलग पत्र लिखे हैं। एक पत्र में मंडल की बैठक के निर्णयों के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। दूसरे पत्र में जमीनों के आवंटन के संबंध में और तीसरे पत्र में गैर सरकारी सदस्यों की भूमिका, पुराने रजिस्ट्रेशन बहाल करने जैसे मामलों व उनसे संबंधित नियमों की जानकारी मांगी गई है। मंडल के आयुक्त पद पर आईएएस चंद्रमोहन मीणा को हटाकर आरएएस अजयसिंह चित्तौड़ा को लगाने के बाद से मंडल सुर्खियों में आया था।

एक ही बोलीदाता का मामला अटका

मंडल की 8 फरवरी की मीटिंग के जिन फैसलों पर रोक लगाई गई है, उनमें जमीन नीलामी के मामलों में आरक्षित दर से ज्यादा राशि मिलने पर एक ही बोलीदाता रखने की अनुमति दी गई थी। पहले न्यूनतम तीन बोलीदाता रखने का प्रावधान था। इस मीटिंग में कुछ नए पद सृजित करने और नए वाहन खरीदने के फैसले भी किए गए थे। अब नए कार्यालय खोलने, कुछ विकास कार्यों, जमीन आवंटन के काम पर भी सरकार की निगाह है।

वजह क्या?

आवासन मंडल के कुछ सदस्यों ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री को जमीनों की अवाप्ति और संस्थाओं को जमीन आवंटन में अनियमितताओं की शिकायत की थी। इसके अलावा मंडल में गैर सरकारी सदस्यों को काम नहीं देने की भी शिकायत की गई थी। संभवत: इसके बाद ही नगरीय विकास विभाग की ओर से आवासन आयुक्त को पत्र लिखा गया।

इस पत्र में गैर सरकारी सदस्यों की भूमिका के बारे में जानकारी मांगी गई है। इसी पत्र में जानकारी चाही गई है कि यदि किसी बिंदु पर अध्यक्ष, आवासन मंडल एवं आवासन आयुक्त के बीच मतभिन्नता हो तो इस संबंध में की जाने वाली कार्रवाई के क्या नियम हैं?

पुराने रजिस्ट्रेशन की बहाली के नियम पूछे

नगरीय विकास विभाग की ओर से लिखे गए पत्र में जानकारी मांगी गई है कि मंडल द्वारा आवंटित ढांचे को कितने साल में पूरा करने का नियम है। एक शहर से दूसरे शहर और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भूखंड अथवा मकान ट्रांसफर करने के क्या नियम हैं। निर्धारित समय में राशि जमा नहीं कराने पर निरस्त किए गए आवंटन को बहाल करने के नियम क्या हैं। इसके लिए सक्षम अधिकारी कौन है और किस नियम में यह प्रावधान है।

विकास की जानकारी के लिए सूचना मांगी

नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव परविंदरसिंह पंवार का कहना है कि ये सूचनाएं केवल इसलिए मांगी जा रही हैं ताकि ये पता लग सके कि निजी और सरकारी क्षेत्र में कहां कितना विकास हुआ है। आवासन मंडल के जिन फैसलों पर रोक लगाई गई है, वे ऐसे फैसले हैं, जिनमें राज्य सरकार की स्वीकृति आवश्यक है। बोर्ड से यही कहा गया है कि इन फैसलों की तथ्यात्मक जानकारी भेजें और आगामी आदेश तक इन्हें लागू नहीं करें।

पुराने रजिस्ट्रेशन बहाल करने के बारे में भी प्रक्रिया और नियमों की जानकारी मांगी है। यह काम किन नियमों से किया जा रहा है। ये नियम किसने बनाए हैं और किस स्तर पर स्वीकृत हुए हैं।

कुछ ही फैसलों पर रोक लगाई है।

हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर अजयसिंह चित्तौड़ा का कहना है कि सरकार ने 8 फरवरी की बोर्ड मीटिंग के कुछ फैसलों पर रोक लगाई है। ये क्या फैसले हैं, इसकी उन्हें तत्काल जानकारी नहीं है। इस बारे में बोर्ड सचिव महावीर प्रसाद शर्मा ही कुछ जानकारी दे सकते हैं। बोर्ड सचिव महावीर शर्मा ने बताया कि जिन फैसलों पर रोक लगाई गई है, उनमें नीलामी मामले के अलावा वाहनों की खरीद और नए पद सृजित करने जैसे मामले हैं।

किसी की चाय नहीं पीता क्या सवाल उठाएंगे
आवासन बोर्ड अध्यक्ष अजयपाल सिंह से भास्कर की बातचीत

नगरीय विकास विभाग से तीन चिट्ठियां आई हैं?
आयुक्त के पास आई होंगी।

आपके दो साल के फैसलों की जानकारी क्यों मांगी जा रही है। क्या गलत फैसले हुए हैं?
गलत फैसले तो नहीं हुए। विधानसभा चल रही है, इसलिए सूचनाएं मांगी होंगी।

चिट्ठियों में विधानसभा सत्र का कोई हवाला नहीं है? नए आयुक्त से आपके मतभेद हैं क्या?
मेरे किसी से कोई मतभेद नहीं हैं। 8 फरवरी की बोर्ड मीटिंग के कुछ फैसलों पर भी रोक लगाई है। एक ही बोलीदाता के पक्ष में नीलामी छोड़ने के फैसले को भी रोक दिया है। इसमें क्या हो गया। पहले भी क्लोज बिड होती थी, अब भी क्लोज बिड का फैसला किया था। इसमें पारदर्शिता बनी रहेगी। जहां तक फैसलों पर रोक की बात है तो सभी फैसलों में सरकार की वैसे भी स्वीकृति लेनी होती है।

पुराने रजिस्ट्रेशन बहाल करने की जानकारी भी सरकार ले रही है, इसमें भी कोई गड़बड़ी है।
ये काम सभी चेयरमैन करते हैं, मैंने भी किए हैं। जहां तक गड़बड़ी की बात है तो सभी जानते हैं कि मैं किसी की चाय तक नहीं पीता।





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