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आमेर महल में नजर आएगा दो सौ साल पहले का नजारा

जयपुर.scenary आमेर महल में आने वाले पर्यटक दो सौ साल पुरानी स्थिति से रूबरू हो सकेंगे। कई सालों से बंद पड़े महल के वाटर लिफ्टिंग सिस्टम को भी दुरुस्त किया जा रहा है ताकि पर्यटकों को यह बताया जा सके कि महल में किस तरह से पानी की व्यवस्था होती थी। अल्बर्ट हॉल में पिछले पचास साल से बंद पड़े टंकी के आकार के मटकों को महल में रखा गया है। पुरातत्व विभाग आमेर महल के वास्तविक स्वरूप को दिखाने के लिए राजस्थान के विभिन्न पूरा स्मारकों से पुरानी वस्तुओं को एकत्रित किया जा रहा है।

महल में रखे गए टंकी के आकार के मटके : दो सौ साल पुराने इन मटकों को आमेर महल में रखवाया गया है। इनकी ऊंचाई सात फीट तथा चौड़ाई पांच फीट हैं। पानी को ठंडा रखने के लिए पहले ऐसे बड़े मटके रखे जाते थे।

अब पर्यटक देखेंगे-महल में कैसे पहुंचता था पानी : महल में पानी की व्यवस्था के लिए चार टांके बने हुए हैं। तीन टांकों में बरसात का पानी एकत्रित होता था तथा एक टांके में मावठे से पानी पहुंचाया जाता था। इसके लिए पांच मंजिला पानी सिस्टम बना हुआ है। प्रत्येक मंजिल पर होद तथा दीवारों में नालियां बनी हुई हैं। इस टांके से महल में पानी सप्लाई के लिए दीवारों के अंदर सिकोरें की पाइप लाइन डाली गई थी बाद में तांबे की पाइप डाली गई। पानी आपूर्ति के इस सिस्टम की मरम्मत की जा रही है।

यहां-यहां सजेंगी पुरानी वस्तुएं : शीश महल के सामने गद्दे तथा परदे लगाए जाएंगे। इसके अलावा मानसिंह महल, दीवाने खास तथा जलेब चौक को पुरानी कलाकृतियों व परंपराओं के आधार पर सजाया जाएगा।

महल पहुंची पुरानी वस्तुएं : आमेर महल में नाहरगढ़ से तीन तोप तथा पांच पुरानी तिजोरियां भी जलेब चौक रखवा दी गई हैं। पानी गर्म करने के कड़ाह भी अलग-अलग स्थानों से महल में रखे गए हैं।

पुरानी लुक से रूबरू होंगे पर्यटक: आमेर महल के अधीक्षक जफर उल्लाह खां का कहना है कि बंद पड़े पानी के पुराने सिस्टम की मरम्मत की जा रही है तथा महल में आने वाले दरवाजे भी खोले जा रहे हैं।





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