अगरतला/ शिलांग/ नई दिल्ली: त्रिपुरा में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा ने अपने विरोधियों को करारी शिकस्त देते हुए 60 सदस्यीय विधानसभा में लगातार चौथी बार स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। उधर मेघालय विस की 60 में से 59 सीटों पर हुए चुनावों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल पाया है, जिससे वहां त्रिशंकु सरकार बनने के आसार पैदा हो गए हैं। त्रिपुरा में कांग्रेस 25 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
शुक्रवार को घोषित चुनाव नतीजों के अनुसार, त्रिपुरा में माकपा को 46 सीटें मिली हैं, जबकि उसके सहयोगी दलों- आरएसपी को दो और भाकपा को एक सीट हासिल हुई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 10 सीटों पर कब्जा जमाया है। उसकी सहयोगी आईएनपीटी को सिर्फ एक सीट से ही संतोष करना पड़ा है।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार (माकपा) ने धानपुर विस सीट पर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,900 मतों से पराजित किया।
कांग्रेस को सीख : माकपा महासचिव प्रकाश करात ने नई दिल्ली में कहा कि कांग्रेस को त्रिपुरा के नतीजों से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को अवसरवादी पार्टी भी कहा।
मेघालय में कांग्रेस अगुआ : मेघालय में 59 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 25 सीटें हासिल हुई हैं। निवर्तमान विस में गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर चुकी कांग्रेस को अब चुनाव जीतने वाले निर्दलीयों और दो छोटे दलों- हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचएसपीडीपी) और खुन हायन्युत्रिप नेशनल अवेकिंग मूवमेंट (केएचएनएएम) की मदद से दोबारा सत्ता में आने की उम्मीद है।
अन्य दलों की स्थिति : मेघालय के अन्य दलों में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की अगुवाई वाली एनसीपी ने 15, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) ने 11, एचएसपीडीपी ने दो और केएचएनएएम व भाजपा ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की है, जबकि चार निर्दलीय उम्मीदवार भी सफल रहे हैं।