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शोभा पर अशोभनीय रुख!

चंडीगढ़.bhardwaj अलग हाईकोर्ट को हरियाणा की शोभा बताने वाले केंद्रीय कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज के समय-समय पर बदलते बयानों पर गौर करें।

मार्च 2006 : ‘हरियाणा के लिए अलग हाईकोर्ट होना चाहिए और मैं इस बात का वादा करता हूं।’ (हरियाणा से राज्यसभा में चुने जाने से पहले)

जुलाई 2006 : अलग हाईकोर्ट राज्य की शोभा होता है। ऐसे में हरियाणा का भी अलग हाईकोर्ट होना चाहिए। (चंडीगढ़ में हिंदी सम्मेलन)

2007 : हरियाणा के लिए अलग हाईकोर्ट तो बनेगा लेकिन यह चंडीगढ़ के अलावा किसी दूसरी जगह पर ही संभव हो सकेगा।

6 मार्च 2008 : हरियाणा के लिए अलग हाईकोर्ट की जरूरत नहीं है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 10 जज और बढ़ाए तो जा रहे हैं। अब मांग नहीं होनी चाहिए। (झज्जर में ज्युडिशियल कांप्लैक्स का उद्घाटन समारोह)

गवाहों के बयान बदलने के खिलाफ सजा के प्रावधान के लिए संसद में बिल लाने की वकालत करने वाले कानून मंत्री हसंराज भारद्वाज भी हरियाणा के लिए अलग हाईकोर्ट के मुद्दे पर वक्त-वक्त पर बयान बदलते रहे हैं। राज्यसभा में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने वाले भारद्वाज पेशे से एडवोकेट हैं और देश के कानून मंत्री हैं। उनका इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर बयान बदलना हरियाणा के कानूनविदें के गले नहीं उतर रहा।

वीरवार को झज्जर में अलग हाईकोर्ट के मसले पर भारद्वाज के यू टर्न लेने से हाईकोर्ट में वकालत करने वाले हरियाणा के वकीलों में खासा रोष है। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के चेयरमैन जयवीर यादव मानते हैं कि भारद्वाज को अपने बयान पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि यह न केवल लीगल कम्युनिटी बल्कि राज्य के लोगों के हित में भी है।

भारद्वाज के बयान से हैरान सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल हरीश राठी कहते हैं, ‘भारद्वाज को सांसद चुने जाने से पहले किया वादा निभाना चाहिए।’ बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन सीनियर एडवोकेट राजदीप टकोरिया ने उनके बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हरियाणा से सासंद होने के बावजूद भारद्वाज उसके हितों की उपेक्षा कर रहे हैं।

मुझे कानून मंत्री के ऐसे किसी बयान की जानकारी नहीं है।
-हवा सिंह हुड्डा, एडवोकेट जनरल और अलग हाईकोर्ट की मांग के लिए बनी कमेटी के सरपरस्त

हम अलग हाईकोर्ट चाहते हैं। इस संबंध में केंद्र की टीम आ चुकी है। हम इसके लिए दबाव बना रहे हैं। कानून मंत्री के बयान को गलत तरीके से कोट किया गया है।
-भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री हरियाणा

क्यों उठी मांग

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 50 फीसदी से अधिक वकील हरियाणा से हैं। इनमें से ज्यादातर का कहना है कि हाल ही में गठित झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के अलग हाईकोर्ट हैं तो 1966 में पंजाब से अलग हुए हरियाणा से पक्षपात क्यों।

हालांकि उसी समय बने हिमाचल का भी अलग हाईकोर्ट है। उनकी दलील है कि हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में हरियाणा को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। आज तक सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा के कोटे से बना कोई भी जज नियुक्त नहीं हो पाया।

कब हुए प्रयास

अलग हाईकोर्ट के लिए सरकार विस में प्रस्ताव पास कर केंद्र के पास भेज चुकी है। इसके बाद केंद्र की टीम यहां का दौरा भी कर चुकी है। इस वक्त मामला केंद्र के पास है। वह चाहे तो इसे संसद से मंजूर करवाकर अलग हाईकोर्ट का गठन कर सकता है।





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