जयपुर.
स्नेह और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति माता अमृतानंदमयी देवी ‘अम्मा’ के आध्यात्मिक प्रेम ने शुक्रवार को शहर के हजारों अनुयायी भक्तों को निहाल कर दिया। उन्होंने प्यार से सभी को गले लगाकर प्रसाद दिया। मां अमृतानंदमयी आध्यात्मिक सेवा समिति की ओर से आदर्श नगर स्थित सूरज मैदान पर जुटे हजारों श्रद्धालु अम्मा के दर्शनों को आतुर थे।
उनकी झलक पाने और फिर आशीर्वाद के लिए वे घंटों कतार में लगे रहे। अम्मा ने स्नेह और वात्सल्य की ऐसी गंगा बहाई कि श्रद्धालु इसमें डुबकी लगाकर गद्गद् हो उठे। अम्मा का स्नेहिल स्पर्श पाने का संध्या के बाद शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक चलता रहा। उनका दर्शन पाने और गले लग आशीर्वाद पाने वाले आल्हादित थे अम्मा से आध्यात्मिक अनुभूति पाकर। कतार में लगे लोगों को अम्मा से मिलने के उत्साह में घंटों लंबी प्रतीक्षा भी चंद लम्हों जितनी लगी।
अम्मा ने कहा, प्रेम हर दिन का, हर पल का होता है। यह किसी दिवस में नहीं बांटा जा सकता। प्रेम की कोई परिभाषा नहीं। हर व्यक्ति, हर वर्ग से प्रेम करो। मनुष्य, पशु, पक्षी, पौधे सभी को पनपने के लिए प्रेम चाहिए। प्रेम का माधुर्य फैलाने वाली सच्ची मुस्कान और मीठे शब्दों की बहुत कमी है। समय की जरूरत है प्रेम का ऐसा दीपक जलाने की जिसका प्रकाश चारों और फैल सके।
कार्यक्रम में मंच पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, आयोजन समिति से जुड़े पीडी सिंह, पंजाबी महासभा के अध्यक्ष रवि नैयर, महापौर अशोक परनामी, समाजसेवी ओमप्रकाश मोदी व सतीश कट्टा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
जरूरतमंदों को मकान : अम्मा ने जरूरतमंदों को व्यक्तिगत दर्शन व प्रेम तो दिया ही, साथ में करीब पंद्रह परिवारों को एक लाख रुपए की कीमत के मकानों की चाबियां सौंपी। कुछ महिलाओं को सिलाई मशीन व पेंशन भेंट की। समिति की ओर से सौ मकान बनाए गए हैं। इनमें से 79 का निर्धारण हो चुका है, जिन्हें जल्द ही जरूरतमंदों को सौंप दिया जाएगा।
विदेशी भक्तों का रैला : विदेशी भक्त भी अम्मा से आशीर्वाद लेने सूरज मैदान पहुंचे। विदेशी छात्र और विदेशी भक्तों ने अम्मा के प्रवचनों को ध्यान से सुना और गले लगकर स्नेहिल आशीर्वाद प्राप्त किया। कई तो स्वयंसेवकों की भूमिका में भी नजर आए।
टॉफी और भभूत दी : आशीर्वाद लेने आ रहे श्रद्धालुओं को अम्मा प्रसाद स्वरूप टॉफी बांट रही थीं। इसके अलावा एक पुड़िया में भभूत भी साथ में दी जा रही थी। भक्तों में भी टॉफी व भभूत लेने की होड़ मची थी।
‘महिलाओं में अनंत आत्मशक्ति’
अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन में मां अमृतानंदमयी ‘अम्मा’ ने कहा कि महिलाओं में अनंत आत्म शक्ति विद्यमान है। यह अनंत शक्ति ही उसे पुरुषों से कहीं आगे ले जाती है। होटल क्लार्क्स आमेर में हुए इस सम्मेलन में 40 देशों के करीब 400 अनुयायी पहुंचे।
अम्मा ने कहा कि किसी भी प्रदेश में महिला शक्ति, बुद्धि, आत्मबल या तेज में पीछे नहीं है। ऐसे में समाज के साथ समन्वय महिला की बड़ी शक्ति होनी चाहिए। महिला अत्याचार के खिलाफ खुद उसे लोहा लेना होगा। वह इस मुकाबले में नाकाम है तो उसमें आत्मबल का अभाव माना जाएगा। अम्मा ने कहा कि स्त्रीधन के रूप में जो सामग्री भेंट की जाती है वह असल स्त्रीधन नहीं है। स्त्रीधन तो स्वयं वह स्त्री है जो ब्याही जाती है।
पुरुषों को महिलाओं का शारीरिक और भावनात्मक सहयोग मिलता है। पुरुष कोई भी काम महिलाओं के सहयोग के बिना नहीं कर सकता। महिलाओं की आंतरिक शक्ति एक नदी के समान है। जो बड़े-बड़े पहाड़ों को चीरती हुई अपना गंतव्य प्राप्त कर लेती है। पुरुष को महिला की इस शक्ति को स्वीकार करना होगा।
राम और रामसेतु पर भी बोलीं अम्मा
अध्यात्म और प्रेम का संदेश देने जयपुर पहुंची मां अमृतानंदमयी ‘अम्मा’ का कहना है कि जब तक मनुष्य ‘मैं’ और ‘मेरा’ की भावना नहीं छोड़ेगा, समाज के लिए उसका योगदान शून्य होगा। धर्म, राजनीति, प्रेम और रामसेतु जैसे विषयों पर अम्मा ने मीडिया से खुलकर बातचीत की।
राजनीति में धर्म और धर्म में राजनीति के सवाल पर अम्मा ने कहा, यदि राजनीतिक लोगों में आध्यात्मिक ज्ञान व धर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी तो निश्चित रूप से वे अधिक सुगमता और कुशाग्रता से काम कर सकेंगे। राजनीति में धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान बेहद जरूरी है। हम मन:स्थिति बदलें तो परिस्थिति स्वत: ही बदल जाएगी।
रामसेतु के मुद्दे पर अम्मा ने कहा कि रामसेतु में लोगों का विश्वास है। इसका विरोध करने वालों की संकुचित भावना उजागर होती है। इसे तोड़ने से करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत होंगी। इसमें वास्तविकता को जगह देनी चाहिए। देश के वर्तमान हालात पर अम्मा ने कहा, सभी में एकता के भाव जरूरी हैं। हम मदर्स डे, ब्रदर्स डे और न जाने क्या-क्या डे मनाते हैं, यानी प्यार केवल एक दिन का रह गया है।
प्रेम तो हर समय हमारे अंदर से प्रस्फुटित होना चाहिए। टीवी चैनलों पर प्रवचन की होड़ पर अम्मा बोलीं, मुझे पता नहीं कि यह व्यावसायीकरण है या कुछ और, लेकिन इससे लोगों को सुकून, शांति और अध्यात्म का ज्ञान मिलता है।