अजमेर. जियारत के लिए आई नाबालिग लड़की को पुलिस लाइन स्थित क्वार्टर में ले जाकर उससे अश्लील हरकतें करने के मामले में आरोपी पुलिसकर्मी और उसे दो साथियों को अदालत ने पीड़िता समेत चश्मदीद गवाह बने दो पुलिसकर्मियों के बयान से पलटने के बाद बरी कर दिया। लेकिन, बयान से पलटने की बात को न्यायाधीश महावीर प्रसाद शर्मा ने गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर तीस दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह था मामला
पिछले साल 19 नवंबर को पुलिस थाना सिविल लाइंस में दर्ज मुकदमे के अनुसार पीड़िता अपनी मां के साथ दरगाह जियारत के लिए आई थी। रास्ते में उसे आरोपी मदन गौरा मिला और बस स्टैंड तक छोड़ने की पेशकश की। इस पर वह मदन के साथ रवाना हो गई। मदन उसे जेल चौराहा ले आया जहां उसका साथी कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और राकेश मिले जो मारूति कार में थे।
तीनों उसे लेकर लक्ष्मीनारायण के पुलिस लाइन स्थित क्वार्टर में ले गए और अश्लील हरकतें करने लगे। घबराकर वह वहां से भागी और चिल्लाई तो आसपास क्वार्टर में रहने वाले लोग इकट्ठे हो गए और आरोपियों समेत पीड़िता को थाने ले गए। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
चश्मदीद गवाह मुकरे
सिविल लाइंस थाने के तत्कालीन प्रभारी रामचंद्र ने मामले की जांच संभाली और गवाहों के बयान दर्ज किए। इसमें पुलिस लाइंस क्वार्टर में ही रहने वाले आदर्शनगर थाना के मालखाना इंचार्ज कुंभाराम और एक कांस्टेबल बनवारी के बयान भी शामिल थे। लेकिन अदालत में दिए बयान में कुंभाराम और बनवारी दोनों ही अपने बयान से पलट गए।
कुंभाराम ने जहां आरोपियों के लड़की को लाने की बात तो मानी लेकिन 16 वर्ष होने की बात से इनकार कर दिया। वहीं बनवारी ने तो यह कह दिया कि वह ड्यूटी से थका हुआ आया था और लड़की ने उसे ऐसी कोई बात नहीं बताई। दोनों के इन बयानों पर विशिष्ट लोक अभियोजक अशोक तेजवानी ने उन्हें पक्षद्रोही गवाह घोषित कर दिया।
पीड़िता ने भी बदले बयान
पीड़िता ने भी अदालत में दिए बयानों में घटना से इनकार कर दिया और क्वार्टर पर ले जाए जाने व अश्लील हरकतें किए जाने से साफ मुकर गई।
अदालत ने माना गंभीर
बयानों के आधार पर अदालत ने मदन गौरा, राकेश और कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण को बरी तो कर दिया लेकिन पुलिसवालों के बयान से मुकरने की बात को गंभीर माना। अदालत ने माना कि सीआइ रामचंद्र ने कुंभाराम और बनवारी के बयान लेना बताया है या तो वह सही है या दोनों ने अदालत में जो बयान दिया वह सही है।
लेकिन दोनों बातें सच नहीं हो सकती, ऐसे में मामले की जांच जरूरी है। अपर जिला एंव सेशन न्यायाधीश महावीर प्रसाद शर्मा ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि जांच कर दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर तीस दिन में रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाए।