बीकानेर.
होलाष्टक में अभी एक सप्ताह बाकी है लेकिन शहर के मस्तानों की टोलियां मस्ती में अभी से झूमने लगी है। जो भी इन्हें मस्ती में देखता है वह भी उनके साथ हो लेता है। लोकगीतों पर झूमते इन दीवानों की कब शाम से रात हो जाती है इन्हें पता ही नहीं चल पाता। सांझ ढलते ही जूनागढ़ हो या पुरानी गिन्नाणी, जोशीवाड़ा हो या पॉश कॉलोनियां मस्तानों की टोलियां निकल जाती है चंग पर धमाल गाने।
चंग पर पड़ती थाप और लोकगीतों के बोल हर किसी को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। पुरानी गिन्नाणी से निकलने वाली खंजर क्लब की टोली में शामिल घनश्याम सोलंकी, अजीतसिंह, हंसराज ओड, प्रेमसिंह खींची, मदनलाल सोलंकी, कैलाश टाक, हरजी सोलंकी, चांद सोलंकी, किसन सोनी जैसे ही ‘रुत आई रे पपीहा थारे बोलण री जैसे कई गीत गाते जहां भी गुजरते हैं लोग इनके साथ हो लेते हैं।
यह टोली रात 12 बजे तक अपनी मस्ती में झूमती रहती है। शाम गहराने के साथ ही जस्सूसरगेट पर फाग के रसिये इकट्ठा हो जाते हैं और चंग पर थाप पड़ते ही गूंज उठते हैं टेर के अंदाज में गाए जाने वाले लोक गीत। ‘सीता परणीजे अरे रामजी चंवर्या मां बैठा हो जैसे धार्मिक आस्था के साथ गाए जाने वाले गीतों में जहां सभी टेर लगाते हैं वहीं ‘देवर म्हांरो रे ओ हरिये रुमाल आलो रे जैसे गीत गूंजते ही टेर देने वालों के साथ ही कुछेक लोग देवर के अंदाज में रुमाल लहराते हुए ठुमक पड़ते हैं।
यहीं से परवान चढ़ने लगता है मस्ती का दौर। कभी ‘चालो देखण ने बाइसा थांरो बीरो नाचै ओ तो कभी औरत के श्रंगार का वर्णन ‘छिटकण दे रे केस भंवर कात्त हो छिटकण दे जैसे गीत के बोल फिजां में गूंज उठते हैं। ज्यों-ज्यों रात गहराती जाती है मस्ती का सुरूर बढ़ता जाता है और आधी रात के बाद तक यह दौर चलता रहता है। कुछ ऐसी ही मस्ती देखने को मिलती है जूनागढ़ के सामने।
यहां मस्तानों की टोलियां लोक गीतों के साथ झूमती-गाती रहती है वहीं बीकानेर रियासत के महाराजाओं का गुणगान भी करती है। मस्ती की यह श्रंखला जोशीवाड़ा में हंसराज पुरोहित, भुवनेश आचार्य, श्यामसुंदर बोहरा, दिनेश आचार्य, निर्मल व्यास, मनीष आचार्य, हरिशंकर, ऋषिदास जोशी और लल्लू महाराज आगे बढ़ा रहे हैं।
यहां रात आठ बजे बाद मस्तानों की महफिल में जंग की थाप पर गूंजते ‘जीरो जीव रो बैरी रे मत बाओ म्हारा परणिया जीरो और ‘मोर बोल्यो रे मनजी गीत यहां से गुजरने वालों को बरबस ही रुकने और इनके साथ झूमने को मजबूर कर रहे हैं। कुछ ऐसी ही मस्ती अब नत्थूसर गेट, मोहता चौक और शहर की पॉश कॉलोनियों में भी दिखने लगी है। मुरलीधर व्यास कॉलोनी, मुक्ताप्रसाद और जयनारायण व्यास कॉलोनी में रात को पान की दुकानों पर मस्तानी टोलियां चंग पर धमाल मचा रही है।