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Shekhawati Shekhawati सीकर.
मनचलों पर पड़ेगा ‘पुलिस का डंडा’
बीच रास्ते, स्कूल-कॉलेज के बाहर लड़कियों व महिलाओं को घूरने वाले मनचले जरा संभल जाए तो उनके लिए अच्छा रहेगा। यह हिमाकत उन पर पुलिस के डंडे बरसा सकती है। बढ़ती छेड़छाड़ की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने दो प्लान तैयार किए हैं। ‘ऑपरेशन रोमियों व ब्लू हॉक’ प्लान के तहत पुलिसकर्मी सादा-वर्दी में मनचलों पर नजर रखेगी। इसके लिए पुलिसकर्मियों को जयपुर में ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर पुलिस ने अप्रैल में अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। एसपी डा. नितिन दीप ने बताया, ‘अप्रैल में महिलाओं के लिए दो ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे। पूरी योजना तैयार कर ली है। हर घंटे की रिपोर्ट लेकर कार्रवाई की जाएगी।’ उन्होंने बताया कि कालेज गल्र्स के साथ अधिक छेड़छाड़ होती है। उन्हें मोबाइल से भी तंग किया जाता है, इस समस्या को भी प्लान में शामिल किया गया है।
लेटर बॉक्स में होगी शिकायतें : स्कूल-कॉलेजों में महिलाओं व लड़कियों की शिकायत सुनने के लिए पुलिस ने आपरेशन ब्लू हॉक भी तैयार किया है। इसके तहत शहर के गल्र्स स्कूल व कॉलेजों में लेटर बॉक्स लगाएगा। जिसमें पढने वाली छात्रा अपने साथ होने वाली छेड़छाड़ या किसी तरह की समस्या दर्ज करा सकेगी। पुलिस ने लड़की व महिला का नाम गुप्त रखने का निर्णय लिया है। यह लेटर बॉक्स हर घंटे चैक किया जाएगा। यह शिकायती पत्र एसपी को पुलिस का जवान ले जाकर देगा, जिसके बाद संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऑपरेशन रोमियो
गल्र्स स्कूल व कॅालेजो के पास अब जल्द ही सिविल ड्रेस में पुरुष व महिला पुलिसकर्मी घूमते नजर आएंगे। पुलिस ने मंजनुओं पर निगरानी कर उनको हवालात का रास्ता दिखाने का फैसला किया है। पुलिस के जवान महिला शिक्षण संस्थाओं के पास आम आदमी की तरह खड़े होकर मंजनुओं पर निगरानी कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखेंगे। योजना के तहत एक थाने के अधीन वाले महिला कॉलेजों व स्कूलों पर निगरानी रखने का काम उस थाने के पुलिस के जवान करेंगे।
..तो खानी पड़ सकती है जेल की हवा
अब पत्नियों को घर से निकालने से पहले जरा सोच लें। कहीं यह कदम आपके लिए (पतियों) भारी तो नहीं पड़ जाएगा। सरकार ने पत्नी को घर से बाहर का दरवाजा दिखाने के सपने देखने वाले पतियों को सबक सिखाने के लिए खास प्लान तैयार किया है।
सरकार सभी सरकारी आवासीय योजनाओं के भवनों के आबंटन में महिलाओं को आधा हक दिलाएगी। इसके बाद पत्नी को घर से बाहर निकालने वाले पतियों को जेल के चक्कर भी काटने पड़ सकते हैं। मकान पर महिलाओं का 50 प्रतिशत हिस्सा रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, योजना लागू करने के पीछे सरकार का मकसद महिलाओं को उनका हक दिलाना है।
सरकार का कहना है कि मकान का मालिक होने का मतलब महिलाओं के पास महज आवास की सुविधा होने तक ही सीमित नहीं है। उससे न सिर्फ उसकी सामाजिक हैसियत बढ़ती है। बल्कि आपदा की स्थिति में उसके लिए सुरक्षा भी होगी। इसके साथ महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में भी कुछ हद तक कमी आएगी। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर गरीब परिवारों को सरकार इंदिरा आवास मुहैया कराती है। आवास पर होने वाले खर्च का 75 प्रतिशत केंद्र व 25 फीसदी राज्य सरकार वहन करती है। जबकि आवास आबंटन परिवार की महिला के नाम होता है।
यहां संवरते हैं बिगड़े रिश्ते : शहर में ऐसी चंद ही जगह है, जहां बिगड़ते रिश्तों को संवारने का काम किया जाता है। प्रजापति विश्वविद्यालय के सीकर केंद्र पर तनाव ग्रस्त महिलाओं को धर्म की पढ़ाई पढ़ाकर टूटे रिश्तों को जोड़ने का काम किया जा रहा है। यहां महिलाओं को नैतिकता का पाठ पढ़ाकर उत्तेजना, मनोविकारों व सामाजिक रिश्तों की परीक्षा में खरा उतरने की सीख दी जाती है।
सफल पुरुषों की जिदंगी में किसी न किसी महिला का हाथ होता है। इसलिए विश्वविद्यालय द्वारा महिलाओं को जागृत करने के उददेश्य से शिविर लगाए जाते हैं। साध्वी ब्रrाकुमारी गोपी ने बताया, ‘सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए राजयोग शिविर लगाए जाते हैं।’ इन शिविरों में महिलाविंग की साध्यवियों द्वारा महिलाओं को रिश्तों की बुनियाद पर खरा उतरने की टिप्स बताई जाती है।
पतियों के पास होंगे दो रास्ते
पतियों को नेकी का पाठ पढ़ाने के लिए सरकार ने दो रास्ते भी तय किए हैं। सूत्रों के अनुसार पति के नाम होने वाले भवन आबंटन में पत्नी का नाम भी शामिल करना होगा या फिर उसे सिर्फ महिला के नाम से ही आबंटित किया जाएगा। इसमें भी अकेली रह रही महिला, विधवाओं तथा किसी विषम परिस्थिति की शिकार हुई महिला को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना रंग लाती है तो महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में भी कमी आएगी।