कोटा.
राज्य सरकार से कृषि भूमि रूपांतरण के नियमों में मिली राहत के बाद भी कोटा जिले में कृषि भूमि पर बसी 200 कॉलोनियां ऐसी है, जिनका आवासीय क्षेत्र में रूपांतरण नहीं हो पाया है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि कई कॉलोनियों में स्वामित्व की शर्ते ही पूरी नहीं हो पा रही। यानि, प्लॉट काटकर भूमि मालिक स्वतंत्र हो गए और परेशानी प्लॉट खरीदने वालों के समक्ष आ गई है।
नगर विकास न्यास ने कृषि भूमि रूपांतरण के लिए दो बार सार्वजनिक रूप से विज्ञप्ति जारी की लेकिन, अभी तक एक भी आवेदन नहीं आया। बताया जा रहा है कि रूपांतरण के इंतजार में कई कॉलोनियों को 15 साल तक हो गए हैं। सितंबर 2007 में सरकार ने कॉलोनियों के रूपांतरण के लिए थोड़ी राहत दी थी। सरकार ने कहा कि वर्ष 1999 से पहले की वे कॉलोनियां जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक निर्माण हो गया है, उनका रूपांतरण कर दिया जाएगा। तब 193 कॉलोनियों को रूपांतरित होना था लेकिन, ताज्जुब की बात है कि एक भी आवेदन नहीं आए। अब कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों का आंकड़ा 200 से अधिक हो गया है।
मास्टर प्लान के अनुसार ही होगा रुपांतरण
वर्ष 2023 के मास्टर प्लान के मुताबिक कृषि भूमि पर बसी उन्हीं कॉलोनियों का रूपांतरण होगा जो प्लान के अनुसार आवासीय क्षेत्र में आती हो। मास्टर प्लान के बाहर आ रही लगभग 40 कॉलोनियों का तो वैसे भी आवासीय क्षेत्र में रूपांतरण नहीं होगा। अभी कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों का आंकड़ा 200 के ऊपर चला गया जबकि, एक भी आवेदन नहीं आया।
—वीके दलेला, उप नगर नियोजक यूआईटी
क्या हैं मापदंड
कॉलोनी 54 प्रतिशत भू-क्षेत्र आवासीय होगा
40 प्रतिशत जगह पर पार्क, सड़क व अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी
2 प्रतिशत जगह को अनौपचारिक कमर्शियल उपयोग के छोड़ा जाएगा
4 प्रतिशत क्षेत्र को पूरी तरह कमर्शियल उपयोग के लिए छोड़ा जाएगा
स्वामित्व की शर्ते पूरी होनी चाहिए
बिना मापदंड रूपांतरण हुआ तो क्या होगा?
यदि बिना मापदंडों के ही कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों का रूपांतरण होता है तो विकास की जिम्मेदारी नगर विकास न्यास पर आ जाएगा।