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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur चिरमिरी. मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना व आत्मविश्वास हो, तो कोई काम नामुमकिन नहीं। यह साबित कर दिखाया है राजेश ने, जो दोनों हाथ कटे होने के बावजूद पैर से लिख कर परीक्षा दे रहा है। बारहवीं के इस छात्र की लगन व कठिन परिश्रम से अन्य विद्यार्थी भी प्रभावित हैं।
हल्दीबाड़ी निवासी राजेश पटेल की मां रामकली पोड़ी कालरी में सब्जी बेचकर घर चलाती है, क्योंकि बचपन में ही राजेश के पिता पुनीत राम की मौत हो गई थी। लिहाजा दस वर्ष पूर्व छठवीं कक्षा तक की पढ़ाई छोड़ कर राजेश घर का बोझ उठाने में मां की मदद करने के लिए मजदूरी करने लगा। एक दिन मजदूरी के दौरान राजेश के दोनों हाथ घास काटने वाली मशीन में फंसने से कट गए।
जीवन से हताश राजेश को सरस्वती शिशु मंदिर-सरभोका के शिक्षक मोती लाल ने पुन: पढ़ाई हेतु प्रोत्साहित किया। लिखने के लिए हाथ न होने पर उन्होंने पैर को कलम पकड़ने का सहारा बनाने को कहा। निरंतर प्रयास से राजेश ने आठवीं बोर्ड में 63.3 प्रतिशत व दसवीं बोर्ड में 60.5 प्रतिशत अंक हासिल किए।
दसवीं की परीक्षा के दौरान उसकी विलक्षण प्रतिभा देख निरीक्षण पर आए अपर कलेक्टर के प्रयास पर राजेश को शासन की ओर से 24 हजार की सहायता राशि भी दी गई। राजेश वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय-हल्दीबाड़ी का नियमित छात्र है।
शिक्षक बनना चाहता है राजेश
राजेश को इस बात दुख है कि कोई सहारा न होने के बाद भी स्कूल में उसे फीस देनी पड़ती है। अन्य छात्रों के सहयोग से उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी है। नगर निगम से निराश्रित योजना के तहत उसे प्रतिमाह 2 सौ रुपए मिलते हैं।
कृत्रिम हाथ बनवाने के बारे में उसने कहा कि पैसों का जुगाड़ नहीं होने से इस दिशा में प्रयास नहीं कर सका। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी विकलांग राजेश शिक्षक ही बनना चाहता है। वह और उसका छोटा भाई रजउ एक छोटी सी झोपड़ी में रह कर अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।