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दूध का ‘दंगल’ शुरू सप्लाई हुई बंद

बिलासपुर. rate दूध के दाम को लेकर व्यवसाइयों और उत्पादकों के बीच शुरू हुई रस्साकशी अब नाटकीय मोड़ पर आ गई है। शनिवार से शहर की सभी डेयरियों और होटलों में दूध की सप्लाई बंद हो जाएगी। हालांकि उत्पादकों ने दुकानों के सामने काउंटर लगाकर दूध बेचने की बात कही है। इन सब के बीच जनता का दूध के लिए परेशान होना निश्चित है।

दाम बढ़ाने को लेकर शुक्रवार को दुग्ध उत्पादकों और शहर के डेयरी व होटल संचालकों की बैठक तय हुई थी। इससे पहले एक बैठक कर व्यवसाइयों ने दाम में दो रुपए तक की वृद्धि करने पर अपनी सहमति जता दी थी। उनका कहना है कि एक ही बार में इससे अधिक वृद्धि करने पर जनता पर काफी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, लेकिन उत्पादक पांच रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की बात पर अड़े रहे।

शुक्रवार को मीटिंग से पहले फोन पर उत्पादकों और व्यवसाइयों की बात हुई। इसमें व्यवसाइयों ने अधिकतम दो रुपए तक वृद्धि का अपना निर्णय सुना दिया। इस पर वे नहीं माने और कम से कम पांच रुपए की वृद्धि करने की बात पर अड़े रहे। नतीजतन व्यवसाइयों ने मीटिंग का बहिष्कार कर दिया। एक भी व्यवसायी बैठक में नहीं पहुंचा।

इससे नाराज दुग्ध उत्पादकों ने उन्हें रविवार से दूध की सप्लाई बंद कर देने की चेतावनी दे दी। इधर व्यवसाइयों ने भी उन्हें शनिवार से ही सप्लाई बंद करने की बात कह दी। कुल मिलाकर दूध के दाम को लेकर उठे इस झमेले का सीधा असर आम जनता की जेब पर ही पड़ेगा।

अब क्या होगा: बैठक के बाद दुग्ध उत्पादकों ने शहर में एक पांपलेट बंटवाया। इसमें उन्होंने बताया है कि डेयरियों में सप्लाई बंद होने के बाद वे शहर के पंद्रह स्थानों पर काउंटर खोलकर वहां से सीधे जनता को दूध की बिक्री करेंगे।

इन काउंटरों में गाय का दूध 18 रुपए व भैंस का दूध 20 रुपए लीटर में बिकेगा। उनका कहना है कि सभी बड़ी डेयरियों और होटल के आसपास ही ये काउंटर खोले जाएंगे। शनिवार से ही शहर में ऐसे काउंटरों के माध्यम से दूध की बिक्री की जाएगी।

दही-घी का क्या: उत्पादकों का कहना है कि वे काउंटर के माध्यम से सीधे दूध बेचेंगे, लेकिन दूध के अलावा दही, घी, पनीर आदि वस्तुओं के लिए क्या उपाय किए गए हैं? इस सवाल का उत्पादकों के पास कोई जवाब नहीं है। लोगों को दूध के अलावा दूध से बनी इन वस्तुओं की भी रोजाना आवश्यकता होती है। उत्पादकों के निर्णय को देखते हुए लग रहा है कि जनता को अब इन वस्तुओं के लिए भटकना पड़ेगा।

दाम की आड़ में नेतागिरी
इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम के बीच संभावना यह व्यक्त की जा रही है कि दूध के दाम बढ़ाने के नाम पर कुछ लोग अपनी नेतागिरी चला रहे हैं। यदि दाम बढ़ाकर उत्पादकों को लाभ पहुंचाना ही उद्देश्य होता, तो उत्पादकों के द्वारा खोले गए काउंटरों में भी दाम पांच रुपए प्रति लीटर बढ़ाकर दूध बेचा जाता।

इन काउंटरों में 18 और 20 रुपए प्रति लीटर में दूध बेचे जाने की घोषणा की गई है, जो वर्तमान दाम से 2 रुपए ही अधिक है। इधर व्यवसाइयों ने दाम में दो रुपए तक की वृद्धि करने के लिए पहले ही अपनी सहमति दे दी थी। इन सबसे लगता है कि केवल नेतागिरी चमकाने के लिए ही यह रस्साकशी की जा रही है।

मिठाइयों पर संकट
उत्पादकों और व्यवसाइयों के बीच शुरू हुआ यह अघोषित युद्ध नहीं थमा तो शहरवासियों को मिठाइयों के लिए तरसना पड़ जाएगा। उत्पादकों ने होटलों को दूध की सप्लाई बंद करने की घोषणा कर दी है। यदि होटल व्यवसाइयों को दूध ही नहीं मिलेगा, तो मिठाइयां बनने का सवाल ही नहीं।

होटल व्यवसायी अनिल खंडेलवाल ने बताया कि निर्णय के बाद फिलहाल मिठाइयां बननी बंद हो जाएंगी। व्यवसायी अपनी ओर से कोशिश करेंगे और जल्द से जल्द कहीं और से दूध का इंतजाम कर समस्या का निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा।





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