जयपुर. महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष छगन भुजबल ने कहा कि लोकशाही में इंसाफ उसे मिलता है, जिसके पास ताकत है। दूसरी ओर राजनीति पार्टियां छोटी जातियों को आपस में लड़ाकर अपना उल्लू सीधा कर रही है और उन्हें संगठित नहीं होने देना चाहती।
भुजबल शनिवार को विद्याधर नगर में सैनी, माली, कुशवाहा, शाक्य, मौर्य व अन्य पिछड़ी जातियों की रैली को संबोधित कर रहे थे। ओबीसी के आरक्षण कोटे को बढ़ाए जाने की वकालत करते हुए भुजबल ने कहा कि पहले ओबीसी का 21 प्रतिशत आरक्षण था, लेकिन इसमें जाटों को शामिल कर लिया गया। इससे दूसरी पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा।
उन्होंने तमिलनाडु की तरह प्रदेश में भी ओबीसी का आरक्षण कोटा बढ़ाए जाने की मांग की। उन्होंने एससी-एसटी की तरह अन्य पिछड़ा वर्र्गो की विभिन्न जातियों की जनगणना किए जाने की पैरवी की ताकि संख्या के आधार पर लोगों को इसका फायदा मिल सके। सभा को परिषद के प्रदेशाध्यक्ष मोतीलाल सांखला, पंजाब से आए हरभजन सिंह, शाहपुरा प्रधान मंजू सैनी, माली सैनी सभा के महासचिव डीआर गहलोत, भाजपा प्रदेश मंत्री मदनलाल सैनी आदि ने संबोधित किया।
गहलोत ने भिजवाया संदेश
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रैली में नहीं आ पाए बल्कि उन्होंने संदेश भिजवाया।
वक्ताओं ने रखी मांग
राजस्थान में अन्य पिछड़ी जातियों के लिए ओबीसी आरक्षण 21 प्रतिशत है, जबकि राज्य में ओबीसी की संख्या 52 फीसदी से ज्यादा है, इसलिए ओबीसी आरक्षण का कोटा 21 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया जाए। विधानसभा व लोकसभा में एससी-एसटी की तरह ही अन्य पिछड़ा वर्र्गो को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।
निजी क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्र्गो के लिए नौकरियों में आरक्षण लागू किया जाए। केंद्रीय लोक सेवा आयोग की भांति केंद्रीय न्यायपालिका सेवा आयोग का गठन किया जाए। न्यायपालिका में सभी स्तरों पर एससी-एसटी व ओबीसी के लिए आरक्षण दिया जाए। पिछड़े वर्ग के आरक्षण में क्रीमीलेयर शर्त को हटाया जाए।