इंदौर. शहर से 12 किलोमीटर दूर रालामंडल की सुरम्य पहाड़ी में विकसित अभयारण्य खत्म कर होटल निर्माण प्रस्तावित है। राज्य सरकार ने केंद्र से इसे डीनोटिफाइड करने की अनुमति मांगी है। इसका खुलासा होने पर नाराज शहर के पर्यावरणविद् बोले- यह जंगल की हत्या है। हालांकि वन विभाग की दलील है इससे जंगल महफूज रहेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
रालामंडल का जंगल का इतिहास तो उपलब्ध नहीं लेकिन पहाड़ी पर सौ साल से भी पुराना होलकरकालीन शिकारगाह है। अभयारण्य में नीलगाय, चिंकारा, चीतल, भेड़की, लकड़बग्घा सहित 23 प्रजाति के जानवर बसते हैं। तेंदुए भी आते-जाते हैं। राज्य वन विभाग के वाइल्डलाइफ बोर्ड ने इसे डीनोटिफाई करने के लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ, नई दिल्ली को प्रस्ताव भेजा है।
राज्य बोर्ड के डिप्टी चीफ ऑफिसर शहबाज एहमद ने कहा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। इसके लिए केंद्रीय बोर्ड के साथ सुप्रीम कोर्ट से भी मंजूरी लेना होगी। उनके पास इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं है कि पर्यावरण (हरियाली) के बगैर पर्यटन की कल्पना कैसे की जा सकती है? इंदौर के आसपास रालामंडल इकलौता पर्यटन स्थल है जहां सालभर में 25 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में प्रस्ताव मंजूर- अभयारण्य प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की मंजूरी से स्थापित होता है। राज्य वाइल्डलाइफ बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं। रालामंडल को डीनोटिफाई करने का प्रस्ताव राज्य बोर्ड ने बनाया जिसे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंजूरी मिली।
19 साल पहले मिला था दर्जा- रालामंडल की 262 हेक्टेयर में फैली पहाड़ी को 19 साल पहले अभयारण्य का दर्जा मिला था। इंदौर में यह एकमात्र अभयारण्य है। इसके समाप्त होने से इंदौर की एक विशेषता भी समाप्त हो जाएगी।
होटल या नेचर एजुकेशन सेंटर?
चर्चा है रालामंडल पर शहर का ही एक ग्रुप होटल बनाना चाहता है। अभयारण्य के लिए नोटिफाइड इलाके में कोई निर्माण संभव नहीं इसलिए डीनोटिफाइड किया जा रहा है।
हालांकि डीएफओ बी.एस. अन्निगेरी कहते हैं न जंगल कटेगा, न होटल बनेगा। जानवर भी यहीं रहेंगे और नेचर एजुकेशन सेंटर विकसित करेंगे। कब तक? इसका खुलासा वे नहीं कर पाए। वे यह भी नहीं बता पाए कि निर्माण नहीं करना है तो डीनोटिफाइड करने की क्या जरूरत?
पहाड़ी के आसपास लोगों ने कॉलोनियां काट दी हैं जो अभयारण्य के कारण विकसित नहीं हो पा रही हैं। डीनोटिफाइड होते ही जमीन के भाव दो-तीन गुना हो जाएंगे।
शहर को नुकसान
रालामंडल के जंगल ध्वनि और वायु प्रदूषण रोकने के लिए ‘शॉक एब्जॉरबर’ हैं।
इंदौर के आसपास 20-25 किमी तक जंगल नहीं होने से रालामंडल ही ताप नियंत्रक है। इसके खत्म होने से शहर का तापमान 4-5 डिग्री बढ़ सकता है।
केवल यहीं विभिन्न प्रजाति के पेड़-पौधे और जीव-जंतु हैं, जिनके हटने से इको सिस्टम भी बिगड़ जाएगा।
(प्रो. संजय व्यास, होलकर साइंस कॉलेज)