जयपुर.
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर शनिवार को प्रदेशभर की साक्षर व शिक्षित महिलाओं ने जयपुर में ‘शक्ति’ प्रदर्शन किया। रामबाग सर्किल स्थित एसएमएस इन्वेस्टमेंट ग्राउंड पर आयोजित महिला साक्षरता शक्ति समागम में राजस्थानी लोक संस्कृति की छाप स्पष्ट नजर आई। महिलाओं ने यहां दिखा दिया कि चूल्हा-चौका संभालने वाले हाथ कलम भी पकड़ सकते हैं और अन्य विधाओं में भी अपनी प्रवीणता प्रदर्शित कर सकते हैं।यह समागम राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल, साक्षरता एवं सतत शिक्षा अभियान व सर्व शिक्षा अभियान की ओर से आयोजित था।
महिला समागम में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि शासन में भागीदारी बढ़ने और साक्षरता से महिलाओं की स्थिति में अंतर आया है, पहले पंचायतों से जुड़ी महिलाएं सरपंच पतियों के साथ आती थीं लेकिन अब वे अकेली अपने फैसले लेने लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं का उत्साह बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब महिलाएं घर संभाल सकती हैं तो राज क्यों नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में केवल दो ही जातियां हैं, एक पुरुष और दूसरी महिला। यहां पर तो मुझे मेरी ही जाति नजर आ रही है। उन्होंने राज्य के बजट को भी महिलाओं के लिए समर्पित बताते हुए कहा कि वे दो साल से महिला केन्द्रित बजट पेश कर रही हैं जिससे महिलाएं सभी क्षेत्रों में आगे आई हैं। यह भी कहा कि महिला के नाम रजिस्ट्री में छूट होने से अब घर और जमीन जायदाद महिलाओं के नाम होने लगी है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने से प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी। इस मौके पर उन्होंने महिलाओं को सशक्तीकरण के पांच सूत्र भी दिए। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण का अंत कविता से किया। हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है हम जहां से जाएंगे रास्ता बन जाएगा..
मंच पर आने से पहले मुख्यमंत्री काफी देर तक महिलाओं के बीच में घूमीं। शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि महिलाओं में बढ़ी साक्षरता से आए सकारात्मक बदलाव के आकलन के लिए यह रैली आयोजित की गई है। शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने भी महिलाओं की साक्षरता व सशक्तीकरण की बात कही। प्रमुख सचिव शिक्षा सुधीर भार्गव ने महिला साक्षरता को जरूरी बताया। मंच पर सांसद किरण माहेश्वरी भी मौजूद थीं।
गर्मी की मार और ‘उनका’ इंतजार
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कार्यक्रम में डेढ़ घंटे देर से पहुंचीं। कार्यक्रम 12 बजे शुरू हो गया था जबकि मुख्यमंत्री करीब डेढ़ बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचीं। आने के बाद भी आधे घंटे तक साक्षरता समितियों की स्टालों का अवलोकन करने लगीं। करीब दो बजे स्टेज पर र्आई, तब तक तीन-घंटे पहले आकर बैठी महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। पांडाल में बनाए 32 ब्लॉक में बैठने के लिए तो कालीन बिछी थी लेकिन वहां एक भी पंखा नहीं था। गर्मी से महिलाएं और छोटे बच्चे खासे परेशान हुए। पीने के पानी की कमी थी। ऐसे में रामबाग सर्किल के पास टूटी पाइप लाइन से बहते पानी से उन्होंने प्यास बुझाई। खाना नहीं मिला तो चाय-समोसा काम आए।
इस्लाम ने दिया है औरत को ऊंचा दर्जा
जमाते इस्लामी हिंद महिला प्रकोष्ठ की ओर से एमडी रोड के मुस्लिम मुसाफिरखाने में महिला अधिकार कॉन्फ्रेंस हुई। इसकी अध्यक्षता जमात के प्रदेशाध्यक्ष मुहम्मद सलीम इंजीनियर ने की। जमाते हिंद की प्रदेश संयोजक शाकिरा खातून कहा कि इस्लाम ने औरत को ऊंचा स्थान प्रदान किया है।
इस्लाम के अनुसार औरत का वास्तविक कार्यक्षेत्र उसका घर है, जहां रहकर वह बच्चों की परवरिश कर सकती है, उन्हें अच्छी शिक्षा और संस्कार देकर अच्छा नागरिक बना सकती है। इस अवसर पर कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम, शराबबंदी, इस्लामी शिक्षा को बढ़ावा देना आदि प्रस्ताव पारित किए गए। गल्र्स इस्लामिक आर्गनाइजेशन की छात्राओं ने गीत पेश किए।