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अल्पबचत : घट रही है खातों में जमा रकम

ग्वालियर. अल्प बचत की विभिन्न योजनाओं में धन जमा करने में अब ग्राहकों की रुचि नहीं है। ठीक ऐसी ही स्थिति एजेंटों की है। जिला कार्यालय में जनवरी तक के उपलब्ध आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि ग्राहकों ने विभाग की योजनाएं नापसंद कर दी हैं। संचालनालय अल्पबचत ने इस वर्ष जिले को 260 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य दिया है। जनवरी तक की स्थिति में इस लक्ष्य की तुलना में 188 करोड़ रुपए विभिन्न योजनाओं में जमा हुए पर पहले से जमा 222 करोड़ रुपए ग्राहकों ने निकाल भी लिए।

इस स्थिति में विभाग का लक्ष्य के पास पहुंचना तो दूर उल्टे 34 करोड़ रुपए कम हो गए। ऐसा पहली बार हुआ है जब विभाग की उपलब्धि मायनस में हुई है। डाकघर से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अल्प बचत की लगभग एक दर्जन योजनाओं पर ग्रहण उसी वक्त लग गया था जब 31 मार्च 2006 को विभाग ने प्रोत्साहन योजना बंद की थी। बताया जाता है कि वर्ष 2005-06 में जिले को लक्ष्य 250 करोड़ रुपए मिला था।

तब प्रोत्साहन योजना के कारण उपलब्धि 152 फीसदी रही थी। इसके एक साल बाद अर्थात वर्ष 2006-07 में लक्ष्य 400 करोड़ का मिला था पर उपलब्धि 34.41 फीसदी तक ही पहुंच सकी थी। योजनाओं में धन जमा न होने का दूसरा बड़ा कारण बैंक की तुलना में डाकघरों में कम ब्याज दर को भी माना जा रहा है। कारोबार कम होने के कारण ही अब जिला कार्यालय में एजेंटों की चहल-पहल कम हो गई है और दफ्तर लगभग वीरान सा रहने लगा है।

जिला कार्यालय के अनुसार गत वर्ष तक हर माह 30 आवेदक एजेंट बनने के लिए आवेदन करते थे पर अब यह संख्या घटकर पांच से सात रह गई है। कुछ ऐसे आवेदन भी कार्यालय में पहुंचे हैं जिनमें एजेंट ने अब काम न करने की इच्छा जाहिर की है। उल्लेखनीय है कि जिले में इस समय 450 पुरुष एजेंट हैं जबकि 800 के करीब महिला एजेंट। महिला एजेंटों की संख्या इसलिए अधिक है कि इनको पुरुष एजेंटों की तुलना में अधिक कमीशन मिल रहा है।





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