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मानो सजा हो मान सिंह का दरबार..

ग्वालियर.g ग्वालियर हेरीटेज महोत्सव में शनिवार का माहौल बड़ा खुशनुमा रहा। महोत्सव की रंगत पहले दिन से कुछ और निखरी हुई थी। रंगीन रोशनी में नहाया हुआ मंच, वातावरण में गुंजायमान संगीत की स्वरलहरियां, मंच के चारों ओर समर्पित भाव से बैठे श्रोतागण। कुछ यूं लग रहा था, जैसे महाराजा मानसिंह के दरबार में संगीत सभा सजी हो। इस स्वरमयी संध्या में देश के प्रख्यात सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खां, उनके पुत्र अमान और अयान अली की सरोद पर की गई जुगलबंदी ने संगीत रसिकों को भावविभोर कर दिया।

मुक्ताकाशी और जल से घिरे हुए मंच पर उस्ताद जी से पूर्व अमान और अयान अली बंगश की उपस्थिति हुई। उन्होंने सरोद पर सर्वप्रथम राग पूरिया धनाश्री प्रस्तुत किया। इन युवा गायकों ने जब सरोद के तारों को छेड़ना शुरू किया तो एकाएक वातावरण परिविर्तित होना प्रारंभ हो गया। सरोद से होते हुए संगीत की मधुरता श्रोताओं के हृदय तक पहुंचने लगी और वह मंत्रमुग्ध से होते दिखे। इसके पश्चात उन्होंने अपने वादन को कुछ और आगे बढ़ाते हुए पुन: राग पूरिया धनाश्री में एक कम्पोजीशन सुनाया।

सरोद पर जिस गति और चपलता से उन्होंने अपनी उंगलियों को थिरकाया, श्रोता उनके कायल हो गए। इसके पश्चात मंच पर उस्ताद अमजद अली खां साहब की आमद हुई। उन्होंने सर्वप्रथम ग्वालियर के श्रोताओं का अभिवादन किया तथा अपने गुरुजनों को नमन किया। उन्होंने अपनी प्रथम प्रस्तुति को अपनी धर्मपत्नी शुभालक्ष्मी खां को अर्पित किया तथा स्व-निर्मित राग शुभालक्ष्मी की प्रस्तुति दी।

जैसे ही उन्होंने अपना वादन प्रारंभ किया, एकाएक वातावरण कुछ अधिक कोमल हो उठा। सरोद से निकले स्वर हृदय को भेदते हुए जान पड़े और श्रोताओं का रोम-रोम संगीतमय हो उठा। आनंद की यह अनुभूति कुछ और बढ़ी जब उन्होंने गुरु रविंद्रनाथ टैगोर रचित कम्पोजीशन ‘एकला चोलो रे..’ को सरोद पर साधा। कम्पोजीशन में कुछ इस कदर मिठास तथा सहजता महसूस हुई कि संगीत की सामान्य समझ रखने वाले श्रोता भी आनंदित हो उठे।

कुछ पल को ऐसा भी लगा, जैसे यह प्रस्तुति बैजाताल में नहीं कोलकाता के घाट पर हो रही हो। चारों ओर संगीत की मिठास घुली हुई थी और एक अनूठा सौंदर्यभाव बिखरा था। आखिर में उन्होंने राग किरवानी से अपने वादन को विराम दिया। उनके साथ तबले पर संगत की देश के प्रतिष्ठित बनारस घराने के तबला वादक पं. मिथिलेश कुमार झा और सत्यजीत तलवलकर ने। उस्ताद जी को सुनना निश्चित ही ग्वालियर के श्रोताओं के लिए अविस्मरणीय क्षण था। इस संगीत निशा में बड़ी संख्या में श्रोताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मधुरत संध्या का संचालन साधना श्रीवास्तव ने किया।





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