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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. समर्थन मूल्य व लिंकिंग से धान खरीदी होने के बाद हाल ही में अंतिम मिलान में इसकी शिकायत जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों से की गई। विपणन अधिकारियों ने खुलासा किया कि बिलासपुर जिले में अब तक 4 हजार, 676 क्विंटल धान कम मिला है, जबकि पूरे जिले में करीब 26 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई है।
जांजगीर-चांपा जिले में इस बार 33 लाख क्विंटल धान खरीदी गई है, जिसमें से करीब 63 हजार क्विंटल धान कम मिले हैं। इधर अन्य स्थानों से करीब ढाई हजार क्विंटल धान कम पाया गया है। इधर यह भी शिकायत की गई है कि सहकारी समितियों ने किसान से कम धान खरीद कर उन्हें अधिक मूल्य चुका दिए हैं। इस कारण संग्रहण केंद्र में धान तौल में कम मिला है।
इधर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी इस बात को स्वीकार करने तैयार नहीं है। वे सहकारी समितियों को बचाव कर रहे हैं। एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सहकारी समितियों द्वारा किसानों से धान खरीदने में लापरवाही नहीं बरती गई है, जबकि ट्रांसपोर्टिग और संग्रहण केंद्रों में तौल के दौरान ही धान की हेराफेरी हुई है। सहकारी समितियों पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
हालांकि अधिकारी अभी खुलकर सामने नहीं आए हैं, लेकिन धीरे-धीरे ही सही, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। सूत्रों का कहना है कि जांजगीर व बिलासपुर जिले में कई ऐसे संग्रहण केंद्र हैं, जहां धरमकाटा नहीं लगा है। वहां दस प्रतिशत तौल का नियम लागू होता है। इस दौरान भी गड़बड़ी की जाती है। उधर संग्रहण केंद्रों में धान के बोरों के स्टिक लगे होते हैं, उस दौरान भी कर्मचारियों द्वारा धान की चोरी करने की शिकायतें मिलती रहती है।
कुछ धान सूखने के कारण भी बाद में तौल में कम निकलते हैं। इस बार धरमकाटा विहीन संग्रहण केंद्रों में पेंड्रारोड और डभरा संग्रहण केंद्र से कुछ इसी तरह की शिकायत मिली है। इधर मामले के सामने आने के बाद सहकारी समिति के संचालकों की नींद उड़ गई है। पूर्व में भी सहकारी समितियों पर कम धान खरीदी का आरोप लगाया जा चुका है। इधर इस पूरे मामले से किसानों कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि उन्हें धान का पेमेंट किया जा चुका है।