कोटा.
कोटड़ी स्थित बेशकीमती खाली भूखंड के संबंध में तत्कालीन स्वायत्तशासन राज्यमंत्री प्रताप सिंह द्वारा दिए गए निर्णय के खिलाफ नगर निगम इसी सप्ताह में हाईकोर्ट में अपील दायर करेगा। इस संबंध में निगम के एक आयुक्त दस्तावेज लेकर जयपुर पहुंच गए हैं। उल्लेखनीय है कि शहर के मध्य कोटड़ी चौराहे पर करोड़ों रुपए के विवादित भूखंड का मामला निगम और कविराजा महिपत सिंह के बीच बरसों से विचाराधीन है।
महिपत सिंह की मृत्यु हो जाने के बाद उनके वारिसान की ओर से स्वायत्तशासन मंत्री के यहां निगरानी याचिका प्रस्तुत की गई थी। इससे पूर्व निगम इस भूखंड पर अपना बोर्ड लगा चुका था। कोटा के संभागीय आयुक्त ने इस पर स्टे सुना दिया। महिपत सिंह के वारिसान ने तत्कालीन स्वायत्तशासन राज्यमंत्री प्रतापसिंह सिंघवी के यहां निगरानी अपील दायर की। इसकी सुनवाई करते हुए सिंघवी ने 13 नवंबर 2007 को नगर निगम और संभागीय आयुक्त के फैसले को निरस्त कर दिया था।
कोटड़ी स्थित भूमि के मामले में निगम ने होईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर ली है। आयुक्त को दस्तावेज लेकर जयपुर भेज दिया गया है। जल्द से जल्द इस मामले में अपील दायर की जाएगी।’
—मोहनलाल महावर, महापौर
फैसले में क्या कहा
सिंघवी ने अपने निर्णय में कहा है कि नगर निगम को स्वयं के पारित नक्शों के विरुद्ध अपील का अधिकार नहीं है। इसमें संभागीय आयुक्त व उनके अनुसरण में निगम के आदेश विधि विरुद्ध हैं। निगम स्वयं पारित नक्शे से बाध्य है। सबजेक्ट टू सिविल टाईटल शर्त लगाने का प्रावधान धारा 170 में नहीं है। भवन निर्माण उपविधि कोटा में उस समय प्रभावी नहीं थी। अत: यह शर्त भी प्रभावहीन है। राज्यमंत्री ने निर्णय में कहा है कि निर्माण स्वीकृति 25-27 मई 04 को बहाल किया जाता है। भूखंड के बारे में स्टे निरस्ती के साथ साथ निगम के आदेश भी निरस्त किए जाते हैं।
अपने ही विभाग के खिलाफ फैसला
स्वायत्तशासन राज्यमंत्री के नाते अपने ही विभाग के खिलाफ फैसला सुनाते समय निगम की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। सिंघवी ने अपने फैसले में लिखा है कि निगरानीकर्ता के वारिसान उपस्थित हैं, लेकिन कोटा नगर निगम की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। सिंघवी ने कहा है कि ंनिगम इस प्रकरण में रुचि नहीं ले रहा है। स्वायत्तशासन निदेशालय की ओर से 22 अक्टूबर 07 को पत्र भी लिया गया, लेकिन निगम ने कोई जवाब पेश नहीं किया। ऐसी स्थिति में कविराजा महिपत सिंह के वारिसान का पक्षकार बनने का आवेदन स्वीकार किया जाता है।
दो इमारतों के बारे में फाइलें तैयार
निगम सूत्रों के अनुसार भीमगंजमंडी और गुमानपुरा की एक-एक बहुमंजिला इमारत के संबंध में भी तत्कालीन मंत्री द्वारा सुनाए गए फैसले का विधि आंकलन कराया जा रहा है। यहां बालकनी को कमरे का रूप दे दिया गया था। इस पर निगम द्वारा आपत्ति किए जाने पर स्वायत्तशासन मंत्री ने निगम की कार्रवाई को गलत ठहराया था। इन मामलों में भी हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी।