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जासूस मामले पर कश्मीर सिंह का यू-टर्न

नई दिल्ली. हाल ही में पाकिस्तान की जेलों में 35 साल तक कैद रहने के बाद रिहा हुए कश्मीर सिंह के बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कश्मीर ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में मीडिया के सामने कहा था कि वह पाकिस्तान में भारत का जासूस था। उसने अपनी सामथ्र्य के मुताबिक देश की सेवा की, लेकिन केंद्र में काबिज सरकारों ने उसके परिवार के लिए कुछ नहीं किया।

उसके इस खुलासे से जहां एक ओर पाकिस्तान की जेलों में बंद दूसरे भारतीय कैदियों की रिहाई में अड़चनें आने की आशंका बढ़ गई है वहीं उसकी रिहाई में प्रमुख भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी की बड़ी फजीहत और आलोचना हो रही है। बर्नी कश्मीर की स्वीकारोक्ति से काफी आहत हैं। हालांकि शनिवार को कश्मीर ने अपने बयान से पलटते हुए कहा कि मीडिया ने उसके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।

होशियारपुर स्थित अपने घर से कश्मीर सिंह ने शनिवार को फोन पर कहा, मीडिया द्वारा मेरा बयान तोड़-मरोड़ दिया गया है। उसके मुताबिक वह जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हुआ था लेकिन पाकिस्तान गैर कानूनी ढंग से कमाई करने गया था। उसने इस बात से इनकार किया कि उसने अपना बयान किसी दबाव में आकर वापस लिया है।

बर्नी ने किया था फोन
सिंह के बचपन के दोस्त और आकाशवाणी के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफ न्यूज गुरमीत सिंह भारद्वाज ने चंडीगढ़ में बताया कि बर्नी ने भी सिंह को फोन करके उनसे उनके बयान के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था।

बाकी कैदियों की रिहाई पर असर पड़ेगा: बर्नी
पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी ने कहा, मैं इन बयानों को सुनकर स्तब्ध हूं। मैं नहीं जानता था कि वह जासूस था या नहीं। मैं 34 वर्ष से जेल में बंद एक व्यक्ति के लिए मानवीय आधार पर काम कर रहा था।

मुझे नहीं पता कि कश्मीर यह बात खुद कह रहा है या लोग ये शब्द उसके मुंह में डाल रहे हैं। लेकिन इससे निश्चित रूप से पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय कैदियों और भारत की जेलों में बंद पाक कैदियों की रिहाई पर असर पड़ेगा। सबसे अहम यह है कि बर्नी ने मौत की सजा पाए भारतीय कैदी सरबजीत के मामले को देखने की बात कही थी।





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