भोपाल. उस अंधे कत्ल को सुलझाने के लिए तमाम पुलिस अफसर जुटे हुए थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में ‘शोभा’ की मदद ली गई। उसे उस स्थान पर लाया गया, जहां लाश पड़ी हुई थी। शोभा घटनास्थल सूंघने के बाद एक तरफ दौड़ लगा दी। कुछ दूर जाकर वह रुक गई। पुलिसकर्मियों ने उस स्थान की छानबीन की तो वहां खून से सना चाकू मिला। उस चाकू के सहारे पुलिस कातिल तक पहुंच गई।
यह घटनाक्रम गत जनवरी का है। सागर में इस कत्ल को सुलझाने में मददगार बनी शोभा पर पुलिस को नाज है। दरअसल, शोभा पुलिस के डॉग स्क्वाड की ऐसी खोजी सदस्य है, जिनके सहारे हत्या, चोरी, डकैती जैसे अपराधों की छानबीन व अपराधी तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिलती है। विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की 23वीं बटालियन के डॉग स्क्वाड के 83 कुत्तों में से केवल 35 का ही घटनास्थल पर सबूतों की खोज में उपयोग हो रहा है। बाकी को वीआईपी के सुरक्षा में लगाई जा रही है।
20 नए मेहमान: प्रदेश पुलिस के डॉग स्क्वाड में 20 नए कुत्तों की भर्ती की जा रही है। इनके साथ ही स्क्वाड में कुत्तों की संख्या बढ़कर 103 हो जाएगी। डॉग स्क्वाड में जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर, र्रिटाईवर, डाबरमैन प्रजाति के 20 कुत्ते खरीदने के लिए टैंडर जारी हो चुके हैं। डॉग स्क्वाड के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2007 से जनवरी 2008 तक 218 मामलों में पुलिस ने घटनास्थल पर खोजी कुत्तों की सहायता ली। पुलिस को 28 वारदातों में ही कुत्तों की मदद से सफलता हाथ लगी।
अंग्रेजी में होती है ट्रेनिंग
सीट-डाउन, स्टैंड-अप, जंप, डू- डोंट डू, रन जैसे अंग्रेजी के शब्द डॉग स्क्वाड में कुत्तों की ट्रेनिंग के लिए उपयोग किए जाते हैं। स्क्वाड के ट्रेनर्स का मानना है कि अंग्रेजी ज्यादा आसान है। उच्चरण में शब्द छोटे होते हैं, जिससे प्रतिक्रिया भी जल्द मिलती है।
राधा, जुगनू, गामा पर है गर्व
विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं और अपराध अनुसंधान में पुलिस की मदद के लिए डॉग स्क्वाड के कुत्तों को 38 गोल्ड और 33 सिल्वर मैडल मिल चुके हैं। इसमें वे कुत्ते भी शामिल हैं जो अब नहीं रहे। ट्रेनर और प्लाटून कमांडर लालबहादुर थापा बताते हैं कि वैसे तो हर डॉग से लगाव रहता है, लेकिन खासकर, राधा, जुगनू और गामा की उपलब्धियों पर हमें गर्व है।