भोपाल. राजा भोज एयरपोर्ट के विस्तार में सबसे बड़ी दिक्कत जमीन को लेकर है। भास्कर की पड़ताल बताती है कि इस काम के लिए गेंद फिलहाल राज्य शासन के पाले में है। क्योंकि वह अभी तक एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को इस काम के लिए आवश्यक जमीन का कब्जा ही नहीं सौंप सका है।
पूरी जमीन नहीं मिली-एयरपोर्ट अथारिटी को एयरपोर्ट विस्तार के लिए 387 एकड़ जमीन की दरकार है। पिछले माह तक राज्य शासन का राजस्व विभाग अथारिटी को केवल 98 एकड़ जमीन का कब्जा ही सौंप सका था। शासन ने बाकी जमीन अधिगृहित भी कर ली है पर विधिवत कब्जा न मिलने के कारण अथारिटी विस्तार का काम शुरू नहीं कर पा रही है।
पिछले दिनों भोपाल प्रवास पर आए एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया के चेयरमेन डा. के रामालिंगम ने साफ कहा ‘हमारी तरफ से कोई देर नहीं है, जब तक जमीन हस्तांतरण के दस्तावेज हमें नहीं मिलते हम काम शुरू नहीं कर सकते। हालांकि अथारिटी ने समग्र मास्टर प्लान तैयार कर दिया है।’ डा. रामलिंगम के इस बयान के बाद अथारिटी ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर जमीन जल्दी देने का आग्रह किया है। वहां के अधिकारियों का कहना है कि वे विस्तार का काम जल्दी करने के लिए तत्पर हैं। अथारिटी इस योजना का समग्र मास्टर प्लान तैयार कर चुकी है।
यह भी है समस्या-एयरपोर्ट विस्तार के लिए सेना से भी जमीन ली जानी है। राज्य सरकार के सामने दिक्कत यह भी है कि जमीन देने के एवज में सेना ने ऐसी शर्त रख दी है, जिसे पूरा करने में पांच करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसके चलते भी विस्तार में समय लगना तय है। हालांकि सेना से ली जाने और उसे दी जाने वाली जमीन को मंजूरी मिलने के साथ ही उसकी नपती हो चुकी है, लेकिन मसला फिर से उलझ गया है।