भोपाल. पीएचई के कर्मचारियों की सोमवार से हो रही हड़ताल का राजधानी की पेयजल व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। नए शहर में जहां पीएचई का अमला संधारण एवं संचालन का काम देखता है, वहां पानी की किल्लत हो सकती है। इसका खमियाजा शहर की पांच लाख की आबादी को भुगतान पड़ सकता है। हड़ताल लंबी खिंचने पर पेयजल व्यवस्था चरमराने के भी आसार हैं। नगर निगम कमिश्नर निकुंज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पेयजल व्यवस्था सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
अधिकतर कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने का दावा: मध्यप्रदेश पीएचई कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष मोहम्मद अनवर सिद्दीकी का दावा है कि प्रदेश में करीब 20 हजार कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। जिनमें राजधानी में कार्यरत 70 नियमित, 1200 कार्यभारित और 200 दैनिक वेतन भोगी पूरी तरह से काम बंद रखेंगे।
इन क्षेत्रों में प्रभावित हो सकती है पेयजल व्यवस्था : नगर निगम में पेयजल व्यवस्था का काम नए शहर के 45 बंगला, प्रोफेसर कालोनी, 74 बंगला, चार इमली, अरेरा कालोनी, एमपी नगर, साउथ नार्थ टीटी नगर, कोटरा, नेहरू नगर और अशोका गार्डन क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
यहां नहीं रहेगा असर : पुराने शहर में पेयजल व्यवस्था का काम नगर निगम का अमला देखता है। इसलिए पुराने शहर में हड़ताल का कोई प्रभाव नहीं होगा। तीस जिलों पर होगा असर: समेत प्रदेश के करीब 30 जिलों में पेयजल व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। स्थिति से निपटने के लिए जिला कलेक्टरों ने नगरीय निकायों को सभी वैकल्पिक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
बहरहाल, रायसेन, होशंगाबाद, हरदा और नीमच और खंडवा जिले में स्थिति सामान्य रहेगी, क्योंकि यहां की पेयजल व्यवस्था नगरीय निकायों के हवाले है। मूलत: पीएचई विभाग का 24 हजार का अमला है, जिसमें से विभाग का नियमित स्टाफ 5000, कार्यभारित 11,000 और दैनिक वेतन भोगी लगभग 8600 है। पीएचई कर्मचारी संघ का दावा है कि विभाग का 70 प्रतिशत अमला हड़ताल पर रहेगा। इससे पेयजल व्यवस्थाएं ठप होना तय है। हड़ताल पर जाने वालों में वाल्वमैन, प्लंबर, टाइमकीपर, फिटर, हैंडपंप तकनीशियन और मीटर रीडर शामिल हैं।
किए हैं इंतजाम: पीएचई भोपाल संभाग के मुख्य अभियंता एके प्यासी का कहना है कि विभाग ने हड़ताल से निपटने के सभी जरूरी इंतजाम किए हैं। नगर निगम कमिश्नर निकुंज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पेयजल व्यवस्था सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
ऐसे लड़खड़ा सकती है व्यवस्था: हड़ताल से भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत सीहोर, विदिशा, बैतूल, राजगढ़, देवास, रतलाम, धार, झाबुआ, शुजालपुर, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, मुरैना एवं छिंदवाड़ा जिलों में पेयजल व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। होशंगाबाद जिले में पचमढ़ी और इंदौर जिले में महू में सेना बहुल क्षेत्रों में जहां पेयजल व्यवस्था पीएचई के पास है, वहां हड़ताल से पेयजल व्यवस्था चौपट होने के आसार है।
होशंगाबाद कलेक्टर जीपी तिवारी ने बताया कि उन्होंने विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण पचमढ़ी को पेयजल व्यवस्थाएं सुचारू रखने के निर्देश दिए हैं। इंदौर कलेक्टर विवेक अग्रवाल का कहना है कि महू में तो पेयजल व्यवस्था स्वयं सेना करती है, साथ ही जिला प्रशासन भी स्थिति पर नजर रखे हुए है। इंदौर में नगरीय निकाय ने आवश्यक प्रबंध किए हैं।
क्या है हड़ताल की वजह : हड़ताल का आह्वान लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का अमला नगरीय निकायों में हस्तांतरित किए जाने की वजह से किया है। कर्मचारी इए निर्णय को वापस लेने की मांग के साथ यह भी कह रहे हैं कि नल जल व्यवस्थाओं का संधारण एवं संचालन पीएचई को वापस किया जाए। जल बोर्ड की स्थापना, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण, कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों को नियमानुसार क्रमोन्नत और उन्हें अनुकंपा नियुक्ति देने की बात भी मांगों में शामिल हैं।