इंदौर.
रालामंडल अभयारण्य खत्म करने की सिफारिश वन विभाग की प्रमुख सचिव अवनि वैश्य, म.प्र. पर्यटन निगम और इंदौर कलेक्टर विवेक अग्रवाल सहित कई अफसरों ने की थी। सभी ने जुलाई 2005 में रालामंडल का दौरा कर प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजी थी।
जनवरी 2006 में इसे लेकर कमिश्नर अशोक दास के साथ भी सभी अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें वन संरक्षक राजेश श्रीवास्तव भी शामिल थे। उसके बाद प्रदेश सरकार ने डीनोटिफिकेशन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा। ताज्जुब तो यह है कि वनमंत्री हिम्मत कोठारी को भी प्रस्ताव भेजने की कोई जानकारी नहीं है। ‘भास्कर’ ने इन अधिकारियों से चर्चा कर पूछा ऐसा प्रस्ताव क्यों बनाया?
मंत्री श्री कोठारी को प्रस्ताव की जानकारी नहीं लेकिन उन्होंने कहा रालामंडल का अभयारण्य का दर्जा समाप्त होने के बाद भी जंगल खत्म नहीं होगा। हमने सभी पहलुओं पर विचार किया था जिसमें पर्यटन को बढ़ावा देने की बात सामने आई थी। हम चाहते है जनता के लिए पर्यटन की दृष्टि से अच्छे स्थान बनें जिनमें रालामंडल भी शामिल है। जनता अभयारण्य रखने का मत देती है तो हम उसका सम्मान करेंगे। इसमें सरकार पर कोई दबाव नहीं है।
श्री दास ने कहा बैठक में अभयारण्य डिनोटिफाई करने की बात नहीं हुई थी। वन विभाग ने यहां इको-टुरिज्म विकसित करने की योजना जरूर बनाई थी। इंदौरवासियों का डर वाजिबहै कि डिनोटिफाइड होने के बाद आसपास की जमीन पर कब्जा हो सकता है।
हालांकि मास्टर प्लान में यदि यह ग्रीन बेल्ट है इसलिए संरक्षण किया जा सकता है। जहां तक पर्यावरण की बात है लोगों को तय करना होगा अभयारण्य चाहिए या इको टुरिज्म।
कलेक्टर विवेक अग्रवाल ने कहा इस जगह का विकास क्षमता के अनुरूप नहीं हो रहा था। इको-टुरिज्म से जनता को सुविधा दी जा सकती है। जहां तक भूमाफिया की बात है क्षेत्र वन विभाग के अधीन होगा और कोई भी न पेड़ काट सकेगा, न जानवरों को नुकसान पहुंचा सकेगा। इको-टुरिज्म बोर्ड भी नजर रखेगा।
जिम्मेदारों को कत्र्तव्य बोध कराएं
इन दिनों शहर में आए ख्यात पर्यावरणविद् किशोर खेरनार ने बताया अभयारण्य इसी लिए बनाए जाते है ताकि मनुष्य की गतिविधियों से पशु-पक्षी तंग न हो। उन्होंने इंदौर की जनता से अपील की रालामंडल अभयारण्य के डी नोटिफाइड न होने दें और आंदोलन करें। साथ ही उन्होंने अधिकारियों व मंत्री को उनके कत्र्तव्यों का बोध कराए जो वे भूल गए हो।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अध्ययन करेगा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रीजनल ऑफिसर ए.ए. मिश्रा ने बताया जीवन के लिए कुल ऑक्सीजन का 0.5 प्रतिशत जरूरत है। क्या इंदौर से अभयारण्य छिन जाने पर वातावरण में क्या बदलाव होगा? इस पर हम अध्ययन करेंगे।
आज रीगल चौराहे पर धरना
अभयारण्य को डीनोटिफाइड किए जाने के विरोध में 10 मार्च को रीगल चौराहे पर दोपहर एक बजे सांकेतिक धरना दिया जाएगा। कांग्रेस विधायक तुलसी सिलावट ने कहा इसे बचाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। मीडिया प्रभारी अभय दुबे ने बताया एक प्रतिनिधि मंडल प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह से भी मिलेगा।
अभयारण्य जरूरी -महापौर
शहर की महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने कहा पर्यावरण के लिए अभयारण्य ही जरूरी। भाजपा के नगर अध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता ने भी इसे यथावत रखने की बात कही।